
दिनभर चले धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के बीच आदर्श सामूहिक विवाह महोत्सव भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें 10 जोड़ों का विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। विवाह की शुरुआत पारंपरिक ‘चूल माटी’ रस्म से हुई। ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ स्थानीय शीतला मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और चूल माटी लाकर हिन्दू रीति-रिवाजों के तहत वैवाहिक संस्कार संपन्न कराए।

कार्यक्रम स्थल पर प्रदेश साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष टहल सिंह साहू एवं तहसील साहू समाज के अध्यक्ष प्रेम साहू सहित सामाजिक पदाधिकारियों ने ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कर्मा माता के जीवन, त्याग, तपस्या और भक्ति पर प्रकाश डालते हुए समाज को उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कर्मा माता केवल आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि सेवा, समर्पण और समानता का संदेश देने वाली प्रेरणास्रोत हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष टहल सिंह साहू उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता तहसील अध्यक्ष प्रेम साहू ने की। विशेष अतिथियों में सोमन साहू, कृष्णा राम साहू, कृष्णा साहू, रश्मि साहू, मदन सोनबरसा, छवि सार्वा, के.आर. साहू, बंशीलाल साहू, शिव कलिहारी, दीपा साहू, मंजूलता साहू, त्रासदास मानिकपुरी, ओमप्रकाश साहू, कमलेश श्रीवास्तव, नेमलाल साहू, गजेन्द्र ठाकुर, सीता साहू एवं बालक साहू प्रमुख रूप से शामिल रहे।

आयोजन समिति में संरक्षक धरम साहू, अध्यक्ष प्रेम साहू, प्रमुख सलाहकार रोहित अठनागर, उपाध्यक्ष जयंत साहू एवं चंद्रिका साहू, संयोजक (न्याय प्रकोष्ठ) निरंजन साहू, सचिव रघुनंदन गंगबोईर, कोषाध्यक्ष चुरामन साहू तथा संगठन सचिव छगन साहू एवं वीणा साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुल मिलाकर, कर्मा महोत्सव का प्रथम दिवस सामाजिक एकता, परंपरा और सकारात्मक बदलाव का संदेश देने वाला रहा।




















