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बालोद में गहराया खाद संकट, 30 से 40 प्रतिशत समितियों में यूरिया खत्म, किसान परेशान

बालोद। खरीफ सीजन 2026-27 की तैयारियों के बीच बालोद जिले में किसानों के सामने खाद संकट गहराता जा रहा है। जिले की अधिकांश सहकारी समितियों में यूरिया खाद की कमी के कारण किसानों को समय पर उर्वरक नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि कई समितियों में पिछले 15 से 20 दिनों से यूरिया का स्टॉक समाप्त हो चुका है, जिससे किसान बार-बार समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुआई को देखते हुए वे पहले से खाद और बीज का भंडारण करना चाहते हैं, ताकि खेती के समय किसी प्रकार की परेशानी न हो, लेकिन खाद की सीमित उपलब्धता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार जिले की लगभग 30 से 40 प्रतिशत सहकारी समितियों में खाद की कमी की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर शासन द्वारा किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से मिलने वाले खाद की मात्रा में कटौती किए जाने से भी किसानों में नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष प्रति एकड़ केवल एक बोरी यूरिया और एक बोरी सुपर फास्फेट खाद उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पिछले वर्ष तक प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया और दो बोरी सुपर फास्फेट खाद मिलती थी। ऐसे में अतिरिक्त आवश्यकता की पूर्ति के लिए किसानों को निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ सकता है, जहां खाद की कीमत अधिक होने से खेती की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है।
खरीफ सत्र 2026-27 के लिए जिले में कुल 46 हजार 300 टन उर्वरकों के भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें 21 हजार 500 टन यूरिया, 5 हजार टन सुपर फास्फेट, 9 हजार टन डीएपी, 4 हजार 300 टन पोटाश, 3 हजार 800 टन एनपीके 20-20, 2 हजार टन एनपीके 12-32 तथा 700 टन एनपीके 16-16 उर्वरक शामिल हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार लक्ष्य के विरुद्ध जिले में अब तक 36 हजार 634 टन खाद का भंडारण किया गया है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 79 प्रतिशत है। वहीं किसानों को करीब 58 प्रतिशत खाद का वितरण भी किया जा चुका है।


हालांकि कागजों पर जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध दिखाई दे रहा है, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। समितिवार वितरण और उपलब्धता में असमानता के कारण कई केंद्रों में किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। बताया जा रहा है कि जिन सहकारी समितियों में 80 प्रतिशत से अधिक किसानों को खाद का वितरण किया जा चुका है, वहां निर्धारित लक्ष्य पूरा मान लिया गया है। ऐसे समितियों को अतिरिक्त खाद की आपूर्ति नई खेप आने के बाद ही की जाएगी। चूंकि जिले में कुल लक्ष्य के मुकाबले अभी तक केवल 79 प्रतिशत खाद का ही भंडारण हो पाया है, इसलिए कई समितियों में खाद की कमी स्वाभाविक रूप से सामने आ रही है।

किसानों का कहना है कि समितियों में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें निजी विक्रेताओं से महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और इसका सबसे अधिक असर छोटे एवं सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले सभी सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बुआई के समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इस संबंध में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी चिंताराम रावटे ने बताया कि जिन समितियों में 80 से 82 प्रतिशत तक खाद का वितरण हो चुका है, वहां निर्धारित लक्ष्य पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि जिन समितियों में 50 से 60 प्रतिशत वितरण के बाद खाद की कमी की स्थिति बनी है, वहां आवश्यकतानुसार अतिरिक्त खाद भेजकर पूर्ति की जा रही है। बावजूद इसके किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है और समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खरीफ सीजन में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जिले में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में यूरिया का 4 हजार 393 टन, सुपर फास्फेट का 2 हजार 815 टन, डीएपी का 1 हजार 265 टन, पोटाश का 1 हजार 634 टन, एनपीके 20-20 का 3 हजार 620 टन, एनपीके 12-32 का 1 हजार 163 टन तथा एनपीके 16-16 का 525 टन स्टॉक शेष है। इसके बावजूद कई समितियों में खाद नहीं मिलने से किसानों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और प्रशासन की वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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