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विश्व पर्यावरण दिवस पर हमर राज पार्टी की मांग: छत्तीसगढ़ में नई कोयला खदानों और थर्मल प्लांटों पर लगे रोक

रायपुर,। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मूल निवासियों के अधिकारों और हितों की आवाज उठाने वाली हमर राज पार्टी ने राज्य सरकार से छत्तीसगढ़ में नई कोयला खदानों तथा थर्मल पावर प्लांटों को अनुमति नहीं देने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि राज्य में पहले से संचालित खदानों और बिजली संयंत्रों के विस्तार पर भी रोक लगाई जानी चाहिए, क्योंकि इनके कारण पर्यावरणीय असंतुलन लगातार बढ़ रहा है।
पार्टी के संरक्षक अरविंद नेता, अध्यक्ष अकबर राम कोर्राम, महासचिव विनोद नागवंशी और प्रदेश अध्यक्ष बी.एस. रावटे सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्तमान में राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 1800 लाख टन कोयले का उत्खनन हो रहा है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बताया जाता है। उनका कहना है कि राज्य के कोयला भंडार उड़ीसा और झारखंड के बाद तीसरे स्थान पर हैं, इसके बावजूद यहां अत्यधिक खनन किया जा रहा है।
30 हजार मेगावाट क्षमता के संयंत्रों पर उठाए सवाल
हमर राज पार्टी ने दावा किया कि बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, सरगुजा, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग जिलों में लगभग 30 हजार मेगावाट क्षमता के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं। इन संयंत्रों में प्रतिवर्ष करीब 1200 लाख टन कोयले की खपत होती है, जिससे बड़ी मात्रा में राख (फ्लाई ऐश) उत्पन्न हो रही है।
पार्टी नेताओं का आरोप है कि फ्लाई ऐश के निपटान की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण इसका बड़ा हिस्सा राखड़ बांधों में जमा किया जाता है। कई बार इन बांधों के क्षतिग्रस्त होने से नदियों और जल स्रोतों के प्रदूषित होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। साथ ही कोयले के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन और तापमान वृद्धि की समस्या गंभीर होती जा रही है।


जल संसाधनों पर भी दबाव
पार्टी ने यह भी कहा कि थर्मल पावर प्लांटों में बड़ी मात्रा में पानी की खपत होती है। इसके लिए हसदेव बांगो परियोजना, महानदी के बैराजों और गंगरेल जलाशय जैसे प्रमुख जल स्रोतों से पानी लिया जा रहा है। उनका दावा है कि इससे सिंचाई क्षमता प्रभावित होने के साथ ही भविष्य में जल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
आदिवासी क्षेत्रों में खनन का विरोध
हमर राज पार्टी ने कहा कि राज्य की अधिकांश कोयला खदानें अनुसूचित क्षेत्र (पांचवीं अनुसूची) के आदिवासी बहुल इलाकों में स्थित हैं। नई खदानों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है और स्थानीय आदिवासी परिवारों का विस्थापन हो रहा है। पार्टी का आरोप है कि प्रभावित लोगों को अपेक्षित रोजगार और पुनर्वास सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पार्टी नेताओं ने भाजपा सरकार पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जल, जंगल और जमीन को कॉरपोरेट हितों के लिए उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
संयुक्त बयान में हमर राज पार्टी ने राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नई कोयला खदानों और थर्मल पावर परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया जारी रही तो पार्टी प्रदेशभर में जनआंदोलन छेड़कर इसका विरोध करेगी।
विश्व पर्यावरण दिवस पर जारी इस बयान के माध्यम से पार्टी ने पर्यावरण संरक्षण, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और आदिवासी हितों को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई है।

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