
दरअसल, प्रशासन द्वारा राजस्व अभिलेखों के आधार पर सदर रोड की वास्तविक चौड़ाई 20 से 40 मीटर बताई जा रही है, जो वर्तमान में अतिक्रमण के कारण घटकर 6 से 10 मीटर रह गई है। इसी आधार पर सड़क की सीमा चिन्हित करने के लिए मार्किंग की गई। जैसे ही मार्किंग शुरू हुई, व्यापारियों में दहशत का माहौल बन गया और अचानक बड़े स्तर पर कार्रवाई की आशंका गहराने लगी।
इसी बीच नगर पालिका द्वारा 8 अप्रैल को जारी नोटिस में व्यापारियों को मात्र 3 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए। इस कार्रवाई को एकतरफा और जल्दबाजी भरा बताते हुए करीब 23 व्यापारी उच्च न्यायालय पहुंच गए।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में व्यापारियों ने तर्क दिया कि वे पिछले 40-50 वर्षों से अपने प्रतिष्ठानों में व्यवसाय कर रहे हैं, नियमित रूप से टैक्स और बिजली बिल का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के अचानक नोटिस जारी कर दिया गया।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर माना कि 3 दिन का समय देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने व्यापारियों को 7 दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर देने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि जब तक सक्षम प्राधिकारी उनके जवाब पर निर्णय नहीं ले लेता, तब तक किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई—जैसे तोड़फोड़ या सामान जब्ती—नहीं की जाएगी।
यह न्यायालयीन प्रक्रिया अपने आप में एक स्वतंत्र घटनाक्रम रही, जिसने व्यापारियों को तत्काल राहत दी और प्रशासनिक कार्रवाई पर अस्थायी विराम लगा दिया।

दूसरी ओर, इसी दिन नगर पालिका परिषद में नपा अध्यक्ष प्रतिभा संतोष चौधरी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में व्यापारी वर्ग, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य अतिक्रमण की समस्या का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से निकालना था।
बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सदर रोड के मध्य से दोनों ओर 4-4 मीटर तक अतिक्रमण हटाया जाएगा, ताकि सड़क चौड़ी हो सके और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाई जा सके। साथ ही यह भी तय किया गया कि भविष्य में निर्धारित सीमा के बाहर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
नपा अध्यक्ष ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि उनके सुझावों को कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के समक्ष रखा जाएगा और सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया जाएगा। बैठक में मौजूद व्यापारियों ने भी शहर के विकास के लिए प्रशासन का सहयोग करने का भरोसा जताया।

इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जहां न्यायालय ने प्रक्रिया और सुनवाई को अनिवार्य बताते हुए तत्काल राहत दी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर संवाद के जरिए समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए गए। दोनों ही पहलू मिलकर यह संकेत देते हैं कि बालोद में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब केवल सख्ती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी प्रक्रिया और आपसी सहमति दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी।




















