रायपुर।मुंगेली जिले के छोटे से गांव टेढ़ाधौंरा की बेटी सुप्रिया सिंह श्रीनेत ने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सीडीएस परीक्षा में ऑल इंडिया चौथी रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में चयनित होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में उन्हें सम्मानित कर बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रिया की सफलता यह साबित करती है कि स्पष्ट लक्ष्य, मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम से किसी भी पृष्ठभूमि का युवा असाधारण उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को सुप्रिया से प्रेरणा लेकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में गंभीर प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर मुंगेली कलेक्टर कुंदन कुमार भी मौजूद रहे।
23 वर्षीय सुप्रिया किसान परिवार से आती हैं। उनकी माता संतोषी सिंह श्रीनेत और पिता वैदेही शरण सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी की शिक्षा और सपनों को हमेशा प्राथमिकता दी। प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त करने के बाद सुप्रिया ने कक्षा 10वीं में 71 प्रतिशत और 12वीं में 58 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन) में स्नातक की डिग्री पूरी की।
इंजीनियरिंग के दौरान ही सुप्रिया ने एनसीसी जॉइन किया। अनुशासन, नेतृत्व और समर्पण के बल पर वे जूनियर अंडर ऑफिसर बनीं। एनसीसी प्रशिक्षण ने उनके भीतर सेना में अधिकारी बनने का सपना मजबूत किया। वर्ष 2023 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ सीडीएस की तैयारी शुरू की। नियमित अभ्यास, सख्त दिनचर्या और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत एसएसबी साक्षात्कार में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और देशभर में चौथा स्थान प्राप्त किया।
सुप्रिया की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश की बेटियों के लिए नई उम्मीद का संदेश है। उन्होंने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सपनों की राह नहीं रोक सकती। पढ़ाई और सैन्य तैयारी के साथ-साथ वे सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं। नृत्य उनकी विशेष रुचि है, जिसने उनके व्यक्तित्व में आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार किया।
मुंगेली की यह बेटी अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में देशसेवा का दायित्व निभाएगी। सुप्रिया सिंह श्रीनेत की यह सफलता पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।




















