
कार्यक्रम केवल फुटबॉल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने का प्रेरक अवसर बन गया। कलेक्टर ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से मजबूत व्यक्तित्व का निर्माण करना है।
मैदान से मिलती है जीवन जीने की सीख
कलेक्टर ने विद्यार्थियों को बताया कि फुटबॉल जैसे खेल टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और संयम जैसे गुण विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि मैदान में खिलाड़ी केवल खेल नहीं खेलता, बल्कि जीवन के संघर्षों से जूझने की तैयारी भी करता है।
उन्होंने बच्चों को पूरे समर्पण और लगन के साथ पढ़ाई करने के साथ-साथ खेल गतिविधियों में नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर का बच्चों के साथ सहज संवाद और आत्मीय व्यवहार विद्यार्थियों के लिए खास अनुभव बन गया। उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर उनका उत्साहवर्धन किया, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार हुआ।

नई पीढ़ी को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का संकल्प
कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और अंचल क्षेत्रों से भी प्रतिभाएं निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास की होती है।

शिक्षा और तकनीक का समन्वय भी देखा
विद्यालय प्रवास के दौरान कलेक्टर ने अटल टिंकरिंग लैब, स्मार्ट क्लास और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने विद्यालय में अध्ययन-अध्यापन, छात्रावास, भोजन व्यवस्था सहित विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
साथ ही विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की मुलाकात के लिए बन रहे विजिटिंग रूम के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।
विद्यालय प्राचार्य एन.पी. नामदेव ने कार्यक्रम में सहभागिता और विद्यालय की आवश्यकताओं के त्वरित निराकरण के लिए कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त किया।

बच्चों के सपनों को नई दिशा
दुधली नवोदय विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम केवल खेल सामग्री वितरण नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को नई दिशा देने का प्रयास था। प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था के समन्वय से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि यदि शिक्षा के साथ खेलों को बराबरी का स्थान मिले, तो बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है और वही भविष्य के सशक्त समाज की नींव बनता है।




















