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बालोद में कलेक्टर का स्कूल निरीक्षण, बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए किया प्रेरित

बालोद।सरकारी स्कूलों की तस्वीर सिर्फ व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले बच्चों के सपनों और आत्मविश्वास से भी तय होती है। इसी सोच को मजबूत करते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने डौण्डीलोहारा विकासखंड के प्राथमिक शाला खपरी पहुंचकर शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उनका फोकस सिर्फ व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के मानसिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास को लेकर उनका संवाद खास रहा।

कलेक्टर ने सीधे कक्षा में पहुंचकर बच्चों से पढ़ाई-लिखाई और उनके भविष्य के सपनों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों को समझाया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को पूरे मन से पढ़ाई करने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अपने लक्ष्य तय कर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। कलेक्टर का आत्मीय संवाद बच्चों के लिए प्रेरणादायक पल साबित हुआ।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की भी जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों के पोषण से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि रसोईया किसी कारणवश काम बंद कर दें, तब भी स्व सहायता समूह की महिलाओं की मदद से भोजन व्यवस्था निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि हर शाला दिवस में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो

कलेक्टर ने बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने फाइलेरिया बीमारी के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से दवा लेने और अपने परिवार के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की नींव बनाता है
निरीक्षण के दौरान स्कूल में निर्माणाधीन अतिरिक्त कक्ष का भी अवलोकन किया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए कक्ष का निर्माण गुणवत्तापूर्ण और बच्चों के अनुकूल वातावरण को ध्यान में रखते हुए किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करने और शिक्षा को जीवन की सफलता से जोड़ने का संदेश बनकर सामने आया। कलेक्टर का यह प्रयास बताता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, सोच और सपनों को आकार देना भी है।

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