
वनमंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को क्षेत्र में अतिक्रमण की सूचना मिली थी। इसके बाद तत्काल फील्ड निरीक्षण किया गया और संयुक्त वन प्रबंधन समिति के साथ स्पष्ट कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई अमल में लाई गई। अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत प्रकरण दर्ज कर वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी।

इस कार्रवाई में विभाग ने आंतरिक जवाबदेही तय करते हुए लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। स्थानीय वन अमले की जिम्मेदारी निर्धारित की गई, जिसके तहत संबंधित बीट गार्ड को निलंबित किया गया, वहीं सहायक परिक्षेत्र अधिकारी को उनके कार्यक्षेत्र से हटाया गया। यह कदम संकेत देता है कि विभाग अब केवल बाहरी अतिक्रमण पर नहीं, बल्कि भीतर की ढिलाई पर भी कठोर निर्णय ले रहा है।

उल्लेखनीय है कि बालोद जिले का वन विभाग बीते कुछ महीनों से विवादों में रहा है। सागौन लकड़ी से अवैध फर्नीचर निर्माण, नदी से बहकर आई सागौन लकड़ियों के “गोला” प्रकरण और संभावित तस्करी की आशंकाओं ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। ऐसे में कंजेली परिसर की यह कार्रवाई विश्वास बहाली की दिशा में अहम मानी जा रही है—जहां एक ओर अवैध कब्जा हटाया गया, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कदम भी उठाए गए।

वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मुक्त कराई गई भूमि पर स्थानीय ग्रामीणों के हित में वनवर्धनिक एवं चारागाह विकास कार्य प्रस्तावित किए जाएंगे, ताकि संरक्षण के साथ-साथ आजीविका और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिल सके।




















