
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में Sri Sri Ravi Shankar के 70वें जन्मवर्ष और आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों की यात्रा को समाज सेवा और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणादायी अभियान बताया। उन्होंने कहा कि 45 वर्ष पहले बोया गया यह बीज आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी शाखाएं दुनिया भर में करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से स्पर्श कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग, ध्यान और प्राणायाम भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और आज पूरी दुनिया इन भारतीय परंपराओं से प्रभावित हो रही है। उन्होंने युवाओं को मानसिक रूप से शांत, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय बनने का संदेश देते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और Mission LiFE जैसे अभियानों को भी “आर्ट ऑफ लिविंग” की जीवनशैली से जोड़ा। उन्होंने कहा कि “धरती मां को केमिकल से बचाना भी आर्ट ऑफ लिविंग है, पानी की हर बूंद बचाना भी आर्ट ऑफ लिविंग है और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही सच्चा जीवन है।”
उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को व्यापक जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए समाज और स्वयंसेवी संस्थाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान की सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब समाज जागता है तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों का समाधान संभव हो जाता है।

इस अवसर पर बालोद जिले के आर्ट ऑफ लिविंग शिक्षक रविप्रकाश पांडेय ने प्रधानमंत्री के संबोधन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सेवा, प्राकृतिक जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया संदेश समाज के लिए अत्यंत सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाला है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग केवल ध्यान और योग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने, तनावमुक्त जीवन जीने और पर्यावरण संरक्षण की चेतना जगाने का अभियान बन चुका है। रवि पांडेय ने बताया कि बालोद जिले में भी संस्था के माध्यम से नियमित योग, मेडिटेशन, युवा जागरूकता और सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ बड़ी संख्या में लोग उठा रहे हैं।
समारोह के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्ट ऑफ लिविंग परिवार और उसके स्वयंसेवकों की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में यह संस्था समाज को सकारात्मक दिशा देने में और बड़ी भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नया ध्यान मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए शांति, ऊर्जा और आत्मिक उपचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।




















