
धमतरी एसपी कार्यालय में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में 2 डीवीसीएम, 6 एसीएम सहित कुल 9 नक्सलियों ने आईजी रायपुर के समक्ष सरेंडर किया। इन पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान इंसास, एसएलआर, कार्बाइन, भरमार बंदूक सहित 5 स्वचालित हथियार, मैगजीन, राउंड, वॉकी-टॉकी और दैनिक उपयोग की सामग्री भी जमा कराई गई।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली
आत्मसमर्पण करने वालों में सीतानदी, नगरी और मैनपुर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय नक्सली कैडर शामिल हैं, जो संगठन में कमांडर, तकनीकी सदस्य और एरिया कमेटी स्तर की जिम्मेदारियाँ संभाल रहे थे। इनमें कई नक्सली 2002 से 2017 के बीच संगठन में शामिल हुए थे और धमतरी, गरियाबंद, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर जैसे जिलों में गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। कुछ नक्सलियों पर 25 तक नक्सल अपराध दर्ज हैं।

लगातार दबाव और सिविक एक्शन का असर
धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य बलों और केंद्रीय बलों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर नक्सल विरोधी अभियानों, जंगल-गांवों में सिविक एक्शन कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं, तथा आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के व्यापक प्रचार का यह प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बताया कि संगठन की खोखली विचारधारा, जंगलों में असुरक्षित और कठिन जीवन, तथा पहले आत्मसमर्पण कर चुके साथियों के सामान्य और सुरक्षित जीवन ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

पुनर्वास नीति बनी बड़ा आधार
शासन की आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाली ईनाम राशि, आवास, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार की गारंटी ने भी इन नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का भरोसा दिया। पुलिस द्वारा जंगलों और दूरस्थ गांवों में पोस्टर-पाम्पलेट, हाथ से लिखी अपीलें और स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से लगातार संदेश पहुंचाया जा रहा था।

संयुक्त प्रयासों से मिली बड़ी सफलता
नगरी एरिया कमेटी, सीतानदी एरिया कमेटी, मैनपुर एलजीएस और गोबरा एलओएस के इन 09 सक्रिय नक्सलियों का आत्मसमर्पण कराना धमतरी पुलिस, डीआरजी, राज्य बलों और केंद्रीय बलों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह सफलता जिले में नक्सलवाद के समूल उन्मूलन की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।




















