
प्राप्त जानकारी के अनुसार संस्थान परिसर में बाथरूम की दीवार निर्माण, प्लास्टर, ईंट जोड़ने और अन्य मरम्मत कार्य कराए जा रहे थे। आरोप है कि इन कार्यों में छात्रों को लगाया गया था, जबकि यह उनके प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है। बताया जा रहा है कि फिटर ट्रेड का छात्र टाकेश्वर कुमार भी अन्य छात्रों के साथ ईंट ढुलाई और निर्माण कार्य में लगा हुआ था।
इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से ईंट ढुलाई में उपयोग किए जा रहे उपकरण में उसका हाथ फंस गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसके दोनों हाथों की पांच उंगलियां कट गईं। घटना होते ही संस्थान परिसर में अफरा-तफरी मच गई। साथी छात्र और स्टाफ घायल छात्र को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
घटना के बाद छात्रों ने संस्थान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पढ़ाई और प्रायोगिक प्रशिक्षण के बजाय उनसे निर्माण कार्य, दीवार मरम्मत, छत ढलाई तथा अन्य मजदूरी के काम कराए जाते हैं। छात्रों ने कहा कि यदि समय पर उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा व्यवस्था होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
इस मामले के सामने आने के बाद संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। तकनीकी शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देना होता है, लेकिन यदि छात्रों से मजदूरों की तरह काम कराया जाए तो यह शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
फिलहाल छात्रों और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई, घायल छात्र को उचित मुआवजा तथा संस्थान में नियमित पढ़ाई और सुरक्षित प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।




















