मार्कफेड के माध्यम से जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों से राइस मिलों और संग्रहण केंद्रों तक धान पहुंचाया जा रहा है। परिवहन का जिम्मा निजी ट्रांसपोर्टरों को सौंपा गया है।
नियमानुसार 10 चक्का ट्रक में 20 टन, 12 चक्का ट्रक में 25 टन और 14 चक्का ट्रक में 30 टन माल परिवहन की अनुमति है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार ट्रकों में 7 से 10 टन तक अतिरिक्त धान भरकर परिवहन किया जा रहा है, जिससे एक ट्रक में कुल वजन 40 टन के आसपास पहुंच रहा है।

इन ओवरलोड वाहनों को कई बार आरटीओ और पुलिस की मौजूदगी में गुजरते देखा गया, लेकिन ‘सरकारी कार्य’ का हवाला देकर इन्हें रोका नहीं जा रहा। सामान्य परिस्थितियों में निजी ओवरलोड वाहनों पर सख्ती दिखाई जाती है, परंतु यहां कार्रवाई का अभाव नजर आता है।
धान उठाव की रफ्तार बढ़ने के साथ ओवरलोड परिवहन का सिलसिला भी तेज हुआ है। ग्रामीण अंचल की सड़कों की भार क्षमता सीमित होने के बावजूद भारी वाहन बेखौफ चल रहे हैं, जिससे नई और गारंटीशुदा सड़कें समय से पहले जर्जर होने लगी हैं।
यह मुद्दा अब सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। आवश्यक है कि संबंधित विभाग नियमों के अनुरूप परिवहन सुनिश्चित करें, ताकि किसी संभावित हादसे और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके।




















