कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर रहीं। उनके आगमन पर शाला प्रबंधन समिति और ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। आयोजन का शुभारंभ मां सरस्वती के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। छत्तीसगढ़ी लोक कला की विविध विधाओं पर आधारित नृत्य, गीत और मंचीय कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने कहा कि वार्षिकोत्सव बच्चों की छिपी बहुमुखी प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच है। शिक्षा के साथ संस्कृति का जुड़ाव ही बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव रखता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को मोबाइल की सीमित दुनिया से बाहर निकालकर पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और स्कूलों में बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
रनचिरई के कार्यक्रम में जिला पंचायत सभापति कांति सोनेश्वरी, जनपद सदस्य कौशल किशोर साहू, सरपंच रूखमणि निर्मलकर, उपसरपंच डेविड साहू, गजेन्द्र निर्मलकर, शाला विकास समिति अध्यक्ष हेमन्त साहू, प्रधानपाठक जितेन्द्र साहू, मोहन लाल साहू सहित शिक्षक, अभिभावक और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
वहीं परसदा (डग) के आयोजन में जिला पंचायत सभापति कांति सोनेश्वरी, जनपद सदस्य कौशल किशोर साहू, सरपंच सत्यवती साहू, उपसरपंच लिलेश्वर साहू, शाला विकास समिति अध्यक्ष नीलांबर साहू, प्रधानपाठक महेश चंद्राकर, हाई स्कूल प्राचार्य नूतन गुप्ता, समस्त शिक्षकगण और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बसंत पंचमी और वार्षिकोत्सव के इस संयुक्त आयोजन ने शिक्षा, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता के महत्व को रेखांकित करते हुए गांवों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया।




















