कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के राजस्व, आपदा प्रबंधन व खेल मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय समाज के संरक्षण, संवर्धन और सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने आदिवासी समाज को सहज, सरल, मेहनतकश और स्वाभिमानी बताते हुए उसकी गौरवशाली विरासत को देश की अमूल्य धरोहर बताया।

मंत्री वर्मा ने शहीद गैंदसिंह नायक के बलिदान और उनके नेतृत्व में 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हुए संघर्ष को याद करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति से पहले ही छत्तीसगढ़ के अरण्य क्षेत्रों में स्वतंत्रता की चिंगारी सुलग चुकी थी। उन्होंने कहा कि गैंदसिंह नायक जैसे जननायकों ने आज़ादी के आंदोलन को दिशा देने का काम किया। समारोह के दौरान मंत्री वर्मा ने मंच से छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत किया, जिससे पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा और माहौल भावनात्मक हो गया। संस्कृति और शहादत का यह संगम कार्यक्रम की खास पहचान बना।

मीडिया से चर्चा में मंत्री वर्मा ने राजनीतिक विषयों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां एक सामान्य कार्यकर्ता भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है। छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पार्टी और अधिक मजबूत होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हल्बा-हल्बी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंतूराम पवार ने की। विशेष अतिथि के रूप में डौण्डीलोहारा विधायक अनिला भेड़िया सहित समाज और प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर शहीद दिवस को आदिवासी समाज के लिए संकल्प और आत्मगौरव का दिन बताया गया।
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और विकास के संकल्प के साथ शहीद गैंदसिंह नायक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।




















