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महुआ से सेहत और स्वावलंबन तक : ग्रामीण नवाचार की नई कहानी…पढ़े प्रदेशरुचि पर

बालोद | छत्तीसगढ़ के वनोपज आधारित नवाचार अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनस्वास्थ्य को नई दिशा देने का माध्यम बनते जा रहे हैं। इसी कड़ी में यज्ञदत्त शर्मा, उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, ने शनिवार को राजनांदगांव स्थित महुआ प्रसंस्करण एवं छत्तीसगढ़ हर्बल संजीवनी विक्रय केंद्र का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान शर्मा ने कच्चे वनोपज से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की निर्माण प्रक्रिया, भंडारण व्यवस्था, पैकेजिंग तथा गुणवत्ता मानकों का सूक्ष्म अवलोकन किया। उन्होंने केंद्र से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनके कार्य, अनुभव और आत्मनिर्भरता की यात्रा को नजदीक से समझा।


महुआ से बन रहे पौष्टिक उत्पाद, बदल रही पारंपरिक छवि
राजनांदगांव के गौरव पथ पर स्थित इस महुआ प्रसंस्करण केंद्र में महिलाएं महुआ से एनर्जी बार, बिस्कुट और लड्डू जैसे पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। कभी केवल पारंपरिक उपयोग तक सीमित रहा महुआ अब पोषण और स्वास्थ्य से जुड़कर नई पहचान गढ़ रहा है। इससे न केवल महुआ की छवि बदली है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और सम्मानजनक आय के अवसर भी सृजित हुए हैं।

अर्जुन की छाल से आयुर्वेदिक चाय, सेहत की ओर कदम
केंद्र में एक और अभिनव पहल के तहत महिलाएं अर्जुन वृक्ष की छाल से आयुर्वेदिक चाय तैयार कर रही हैं। यह चाय हृदय स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। हृदय की मांसपेशियों को सुदृढ़ करने, कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक यह पेय आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद का सार प्रस्तुत करता है।


प्रबंध संचालक आयुष जैन के मार्गदर्शन में अर्जुन की छाल और सोंठ से बनी इस चाय को आम नागरिकों तक पहुंचाने की पहल की गई है। सर्दियों में विशेष रूप से लाभकारी यह आयुर्वेदिक मिश्रण पाचन, मानसिक शांति और संपूर्ण स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में सहायक बताया जा रहा है।

महिलाओं की मेहनत को मिला मंच, विपणन से बढ़ा आत्मविश्वास
उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि इन सभी उत्पादों का विपणन और विक्रय छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड के अंतर्गत राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित संजीवनी विक्रय केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। राज्य के विभिन्न वनमंडलों और जिला यूनियनों से जुड़े स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पाद यहां एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने समूह की महिलाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह मॉडल ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।

महुआ को नई दिशा, सरकार की दूरदर्शी पहल
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच और नीतिगत पहल से महुआ को शराब तक सीमित धारणा से निकालकर पोषण और खाद्य सामग्री के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इस नवाचार से महुआ और मिलेट्स जैसे पारंपरिक उत्पाद आधुनिक विज्ञान और बाजार की मांग से जुड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहे हैं।


शर्मा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा नगर निगम महापौर मधुसूदन यादव जैसे जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जिले में स्वास्थ्य, पोषण और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
ग्रामीण स्वावलंबन की मिसाल
महुआ प्रसंस्करण एवं आयुर्वेदिक नवाचार की यह पहल केवल एक केंद्र की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलाव की झलक है, जहां परंपरा और प्रगति साथ चल रही हैं। महिलाओं की मेहनत, स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग और सरकार की स्पष्ट नीति—इन तीनों के संगम से छत्तीसगढ़ ग्रामीण स्वावलंबन की एक नई मिसाल गढ़ रहा है।

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