बालोद।ग्राम मेढ़की के लिए यह क्षण केवल खुशी का नहीं, बल्कि गौरव और आत्मसम्मान का उत्सव बन गया, जब किसान परिवार से निकले युवक खिलेश्वर साहू ने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की एक वर्ष की कठिन प्रशिक्षण यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण कर अपने गृह ग्राम में कदम रखा।
खिलेश्वर की वापसी पर पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंग गया। गाजे-बाजे, आतिशबाजी, फूल-मालाएं, भव्य रैली और भारत माता की जय के गगनभेदी नारों के बीच गांववासियों ने अपने सपूत का ऐतिहासिक स्वागत किया। यह दृश्य केवल एक जवान के सम्मान का नहीं था, बल्कि उस संघर्ष और संकल्प का उत्सव था, जो गांव की मिट्टी से जन्म लेकर देश की सीमा तक पहुंचा।
कठिन प्रशिक्षण, अडिग हौसला
बीते वर्ष जनवरी माह में ग्वालियर प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना हुए खिलेश्वर साहू ने शारीरिक, मानसिक और अनुशासनात्मक कसौटी पर खरे उतरते हुए एक वर्ष की कड़ी ट्रेनिंग पूरी की। यह प्रशिक्षण बीएसएफ जैसे प्रतिष्ठित बल में सेवा के लिए अनिवार्य और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
प्रशिक्षण पूर्ण कर जब वह गांव लौटे, तो हर आंख में गर्व और हर चेहरे पर मुस्कान थी। गांव की गलियों से गुजरती स्वागत रैली मानो यह संदेश दे रही थी कि मेहनत की जीत सबसे बड़ी होती है।
ईश्वर के चरणों में नमन, परिवार के आशीर्वाद से बल
गांव पहुंचते ही खिलेश्वर साहू ने हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर ईश्वर का आशीर्वाद लिया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों से मिलकर सभी के स्नेह और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
घर पहुंचते ही मां ललिता साहू ने बेटे की आरती उतारी, चंदन-रोली से तिलक किया और मिठाइयां खिलाईं। वर्षों की तपस्या और संघर्ष को साकार होते देख मां-बाप की आंखें नम हो उठीं। यह भावुक क्षण गांव की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवित रहेगा।
साधारण परिवार, असाधारण उपलब्धि
खिलेश्वर साहू के पिता मोतीलाल साहू, जो पेशे से किसान हैं, ने कहा—“मेरे बेटे ने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से यह मुकाम पाया है। आज वह देश की सेवा में है, इससे बड़ा गर्व और क्या हो सकता है।”
पूर्व सरपंच कमलेश श्रीवास्तव और ग्राम प्रमुख धनराज साहू ने इसे पूरे गांव के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि सामान्य किसान परिवार का बेटा जब बीएसएफ तक पहुंचता है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद की नई राह खोलता है।
युवाओं के लिए मिसाल बना एक नाम
खिलेश्वर साहू की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा का दीपक बन चुकी है। अब मेढ़की के कई बच्चे बड़े सपने देखने लगे हैं—सेना, अर्धसैनिक बल और देशसेवा की राह पर आगे बढ़ने का साहस जुटा रहे हैं।
यह कहानी साबित करती है कि सीमित साधनों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल दूर नहीं रहती। खिलेश्वर साहू की कामयाबी यह संदेश देती है कि हिम्मत, मेहनत और अनुशासन से हर सपना साकार किया जा सकता है।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर ग्राम की बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे। पूरा गांव एक स्वर में अपने सपूत की सफलता का साक्षी बना।




















