अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि छत्तीसगढ़ की भेजा मैदानी पंचायत से एक सुंदर और प्रेरक दृश्य सामने आया है, जहां 282 श्रमिकों ने एकजुट होकर मानव श्रृंखला बनाई और ‘विकसित भारत जी राम जी’ के संकल्प को समर्थन दिया। यह पहल गरीबी से मुक्ति, रोजगार की गारंटी, आत्मनिर्भरता और स्वावलंबी गांव की दिशा में मजबूत कदम है—ऐसा संकल्प जो देश को उत्साह से भर देता है।
यह तस्वीर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर चल रहे विकास कार्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। ग्राम पंचायत भेजा मैदानी में नए तालाब के गहरीकरण कार्य के दौरान ग्रामीणों और मजदूरों ने मानव श्रृंखला बनाकर योजना के उद्देश्य, महत्व और लाभों का संदेश दिया। इसी कार्य के माध्यम से पंचायत में 282 श्रमिकों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, जो योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे के अनुसार, इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की गारंटी को और सुदृढ़ किया गया है। अब 125 दिनों का रोजगार, सात दिवस में अनिवार्य मजदूरी भुगतान, खेती-किसानी के समय दो माह का कार्य-विराम जैसे प्रावधान किसानों और श्रमिकों के हित में किए गए हैं। जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु अनुकूलन—इन चार प्रमुख श्रेणियों में कार्यों को समेटते हुए ग्राम पंचायतों को 2047 तक विकसित पंचायत बनाने की स्पष्ट परिकल्पना तय की गई है।
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पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल व डैशबोर्ड आधारित निगरानी, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण और सशक्त सामाजिक अंकेक्षण जैसे कदम योजना को नई धार देते हैं। अकुशल श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर कौशल विकास और स्थायी आजीविका से जोड़ने की व्यवस्था भी इसका अहम हिस्सा है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच, भेजा मैदानी की यह तस्वीर और केन्द्रीय मंत्री की सराहना बालोद जिले के लिए बड़ी उपलब्धि है—एक ऐसा क्षण, जब गांव की मेहनत ने देश का ध्यान अपनी ओर खींचा और विकास का संदेश राष्ट्रीय फलक पर दर्ज हुआ।




















