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मोबाइल में OTP न मिलने से किसान परेशान, टोकन कटवाने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

बालोद। धान खरीदी सीजन के बीच किसानों को ऑनलाइन टोकन कटवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल में OTP न मिलने के कारण कई किसान “किसान टोकन तुंहर हाथ” एंड्रॉयड ऐप के जरिए टोकन जनरेट नहीं कर पा रहे हैं। इससे उन्हें दोबारा-तीन बार धान खरीदी केन्द्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसान इसे गंभीर तकनीकी समस्या बताते हुए शासन-प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।

82 लाख क्विंटल खरीद का लक्ष्य, शुरू से दिखी तकनीकी दिक्कत

प्रदेश सरकार ने बालोद जिले में 1,56,822 पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर 82 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है। जिले की 122 समितियों और 143 केन्द्रों में 15 नवंबर से खरीदी शुरू है।
पहले टोकन के लिए किसानों को लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने मोबाइल ऐप लॉन्च किया, ताकि किसान घर बैठे टोकन निकाल सकें। लेकिन OTP न आने की दिक्कत ने यह सुविधा भी आधी अधूरी कर दी है।

किसानों को ऐसे होती है परेशानी

किसान ऐप में लॉगिन करने के लिए अपना किसान कोड और PIN दर्ज करते हैं। इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सबमिट करने पर OTP आता है।
OTP सबमिट होते ही टोकन बन जाता है और किसानों को मैसेज के जरिए यह सूचना भी मिलती है कि किस दिन धान बेचने जाना है।
लेकिन समस्या यह है कि OTP कई किसानों तक पहुंच ही नहीं रहा। इससे लॉगिन प्रोसेस अधूरी रह जाती है और किसान टोकन नहीं कटवा पा रहे।

टोकन सीमा भी बढ़ा रही परेशानी

किसानों ने बताया कि ऐप के नियम के मुताबिक वे सिर्फ 3 बार टोकन ले सकते हैं।
यदि एक बार टोकन निरस्त किया जाता है, तो सिर्फ 2 मौके ही बचते हैं। कई बार OTP न आने या तकनीकी गलती के कारण टोकन रद्द हो जाता है और किसान मौका खो देते हैं, जिससे वे भारी तनाव में हैं।

8 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी

अब तक जिले के विभिन्न केन्द्रों में 17,976 किसानों से 8,02,860.80 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। खरीदी केन्द्रों में लगातार आवक बनी हुई है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।

किसानों की मांग

किसानों का कहना है कि—OTP समस्या का तुरंत समाधान किया जाए,ऐप को स्थिर और त्रुटिरहित बनाया जाए,टोकन की सीमा बढ़ाई जाए ताकि तकनीकी गलती से किसान पीछे न छूटें।

किसानों ने स्पष्ट कहा कि खरीदी व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए शासन-प्रशासन को जल्द कदम उठाने होंगे, वरना धान खरीदी सीजन में अव्यवस्था और बढ़ सकती है।

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