जहां आठ करोड़ की लागत से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को शहर की तस्वीर बदलने वाला बताया गया था, वहीं अब यह अधूरा निर्माण शहरवासियों की परेशानी और धूल-धक्कड़ का कारण बन चुका है।

पीडब्ल्यूडी की उदासीनता और ठेकेदार की मनमानी
दल्लीचौक से रेलवे फाटक तक सड़क को खोदकर महीनों से यूं ही छोड़ दिया गया है। ठेकेदार की सुस्त गति और विभाग की अनदेखी ने निर्माण कार्य को ठप कर दिया है। नतीजतन न केवल यातायात बाधित है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों को घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
खोदी गई सड़क से जल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण कई घरों में पानी की सप्लाई भी बंद है। लोगों को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा। विभागीय अधिकारी इस लापरवाही पर आंख मूंदे बैठे हैं, मानो ठेकेदार और अफसरों के बीच मिलीभगत से जनता की परेशानियाँ कोई मायने नहीं रखतीं।

रहवासी हुए आक्रोशित, सौंपा ज्ञापन
इसी समस्या से परेशान बालोद नगर के रहवासियों ने मंगलवार को पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि 30 अक्टूबर सुबह 11 बजे तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो पूरे राजनांदगांव रोड पर चक्काजाम किया जाएगा।
लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग ने न तो समय-सीमा तय की और न ही निगरानी रखी, जिससे ठेकेदार को मनमानी की खुली छूट मिली हुई है।
धूल, गड्ढे और हादसों से त्रस्त जनता
अधूरे सड़क निर्माण से हर आने-जाने वाले को धूल और गड्ढों की मार झेलनी पड़ रही है। सड़क किनारे रहने वाले परिवारों के घरों में दिनभर धूल का गुबार भर जाता है, वहीं कई लोग फिसलकर घायल तक हो चुके हैं।
मोहल्लेवासियों का कहना है कि बिना चेतावनी और सुरक्षा इंतज़ाम के सड़क को खोद दिया गया, जिससे यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का जाल बन चुका है।

राजनीतिक दलों और अफसरों की चुप्पी
सुस्त काम और जनता की परेशानी पर न तो विभाग के अधिकारी कुछ बोल रहे हैं, न ही राजनीतिक दलों ने कोई रुख अपनाया है।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा ने कहा कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से जनता की परेशानी बढ़ी है।
कसीमुद्दीन कुरैशी, पार्षद ने बताया कि पिछले सवा महीने से काम पूरी तरह बंद है और राहगीरों को भारी परेशानी हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने अब भी कार्रवाई नहीं की, तो जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
अंतरिम चेतावनी ज्ञापन में शामिल प्रमुख लोग
आज हुए सांकेतिक प्रदर्शन और अल्टीमेटम में पार्षद कसीमुद्दीन कुरैशी, निर्देश पटेल, विकास चोपड़ा, दीपक चोपड़ा, शेख मतीन, श्याम टावरी, नवीन परिहार सहित अनेक नागरिक मौजूद रहे।
बालोद का यह मामला सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि व्यवस्था के लचर रवैये और जवाबदेही की कमी का आईना है। जनता टैक्स देती है, लेकिन उसे सुविधा के नाम पर अधूरे निर्माण और धूल का तोहफा मिलता है। अब देखना यह है कि 30 अक्टूबर से पहले विभाग जागता है या फिर जनता को सड़क पर उतरना पड़ता है।




















