प्रदेश रूचि

सड़क निर्माण में लापरवाही या अनियमितता?…बालोद मुख्यालय के सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य पर उठ रहे सवाल

बालोद। जिला मुख्यालय के दल्लीचौक से राजनांदगांव मार्ग रेल्वे फाटक तक लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य की शुरुआत से ही सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे न सिर्फ यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि भविष्य में सड़क की टिकाऊपन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

यातायात जाम और परेशानी

डिवाइडर निर्माण शुरू होने के बाद इस मार्ग पर रोजाना यातायात दबाव बढ़ गया है। विभागीय आदेश के बाद ठेकेदार ने एक तरफ सड़क खुदाई कर आवागमन बंद कर दिया है, जिससे दोपहिया, चारपहिया और मालवाहक वाहनों के लिए जाम और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

डिवाइडर में सड़क का मलबा!

सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ सौंदर्यीकरण का कार्य भी प्रस्तावित है। योजना के अनुसार, डिवाइडर के बीच खाली जगह पर मिट्टी डालकर पौधारोपण किया जाना है। लेकिन ठेकेदार द्वारा सड़क खुदाई से निकले गिट्टी और मुरमयुक्त मलबे को ही डिवाइडर में भरने की बात सामने आई है। इसी पर पौधे लगाए जाने की तैयारी है।

प्रदेशरुचि टीम द्वारा इस विषय पर तकनीकी जानकारों से बातचीत की गई। अधिकांश ने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य के प्राक्कलन (Estimate) में सड़क से निकले मलबे के पुनः उपयोग का प्रावधान नहीं होता। ऐसे कार्यों के लिए अलग से काली उपजाऊ मिट्टी की ढुलाई कर लाई जाती है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि डिवाइडर में डाली जा रही मिट्टी असल में “सड़क का मलबा” है, जिस पर पौधारोपण संभव नहीं है।

विभागीय अधिकारियों की चुप्पी

मामले पर जानकारी के लिए लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता दिनेश माहेश्वरी और कार्यपालन अभियंता पूर्णिमा चंद्रा से मोबाइल कॉल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन खबर लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों ने न तो कॉल रिसिव किया और न ही कॉल बैक किया। विभाग की यह चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।

जांच का विषय

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डिवाइडर में मलबे का उपयोग वास्तव में किया जा रहा है, तो यह कार्य प्राक्कलन और नियमों के विपरीत है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि —

क्या ठेकेदार बिना विभागीय अनुमति के ऐसा कर सकता है?

क्या सड़क निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है?

क्या विभागीय अधिकारियों की जानकारी और सहमति से मलबे का उपयोग किया जा रहा है?

उम्मीदें और आशंकाएं

बालोद जिले के लोग इस परियोजना से उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें एक मजबूत और आकर्षक सड़क मिले। लेकिन निर्माण की शुरुआत में ही गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी ने उनकी उम्मीदों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच करता है या अनियमितताओं को यूं ही नज़रअंदाज़ किया जाता है।

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