प्रदेशरुचि न्यूज़ की रिपोर्ट का बड़ा असर हुआ है। स्कूली समय में गैर-शैक्षणिक आयोजनों में बच्चों को जबरन शामिल करने और पढ़ाई पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को लेकर हमारी खबर सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने तत्काल संज्ञान लिया और शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया। जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब स्कूल परिसर किसी भी आयोजन के लिए आबंटित नहीं होगा और बच्चों को क्लास के समय बाहरी कार्यक्रमों का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा।

नए आदेश के मुख्य बिंदु—
स्कूली बच्चे केवल पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में ही शामिल होंगे।
किसी भी संस्था या बैंक द्वारा कैंप या आयोजन के लिए अब स्कूलों का उपयोग नहीं होगा।
शिक्षा का समय सुरक्षित और अनुशासित रखा जाएगा।
यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि हाल ही में जिले की एक पंचायत ने वित्तीय समावेशन योजना के कैंप के प्रचार के लिए छोटे-छोटे बच्चों को भीड़ जुटाने का साधन बना दिया था। हेडमास्टर तक ने बिना विभागीय आदेश के बच्चों को कार्यक्रम में भेजा और बैंक अधिकारी भी इस उपस्थिति को अपनी उपलब्धि बताने लगे। ऐसे गैरजिम्मेदाराना रवैये ने प्रशासन की मंशा को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
लेकिन अब कलेक्टर के फैसले ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को मजबूती दी है बल्कि बच्चों के हक़ को भी सुरक्षित किया है।
शिक्षकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और माना है कि यह निर्णय छात्रों के भविष्य को बेहतर दिशा देगा।
अभिभावकों ने इसे बच्चों की पढ़ाई के हक़ की जीत बताया है और उम्मीद जताई है कि अब शिक्षा के माहौल में सुधार होगा।
बालोद प्रशासन का यह कदम बच्चों की शिक्षा के अधिकार की रक्षा के साथ-साथ शिक्षा तंत्र में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक पहल है।
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