
भारत-जापान रिश्तों की ऐतिहासिक गहराई
प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध की करुणा से लेकर राधाबिनोद पाल के ‘टोक्यो ट्रायल्स’ तक के साझा इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि गुजरात से हीरों के व्यापारी पिछली सदी में कोबे पहुंचे थे और जापानी कंपनियों ने भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांति लाई।

राज्यों और प्रीफेक्चर्स का सीधा जुड़ाव
मोदी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने देखा कि राज्यों में कितनी क्षमता है। यही सोच प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रीय नीति में शामिल की गई।
उन्होंने बताया कि भारत में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स, वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम जैसे अभियानों से हर जिले और गांव को राष्ट्रीय विकास की धारा में जोड़ा गया है।
नई पहल : State – Prefecture Partnership Initiative
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी अब “पेपर से पीपल और प्रॉस्पेरिटी” तक जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने जापानी पीएम शिगेरु इशिबा के साथ मिलकर स्टेट–प्रीफेक्चर पार्टनरशिप इनिशिएटिव लॉन्च किया।
इसके तहत हर साल कम से कम तीन भारतीय राज्यों और तीन जापानी प्रीफेक्चर्स के प्रतिनिधिमंडल एक-दूसरे का दौरा करेंगे।
स्टार्टअप्स और MSMEs पर जोर
मोदी ने कहा कि जापान के प्रीफेक्चर्स बड़े उद्योगों के साथ-साथ SMEs और स्टार्टअप्स के लिए भी उपजाऊ जमीन हैं। भारत में भी छोटे शहरों से निकले स्टार्टअप्स और MSMEs विकास गाथा लिख रहे हैं।
उन्होंने कहा –“अगर भारत और जापान के ये वाइब्रेंट इकोसिस्टम साथ आ जाएं तो आइडियाज बहेंगे, इनोवेशन बढ़ेगा और नए अवसर खुलेंगे।”
शिक्षा और स्किल डेवेलपमेंट में नया अध्याय
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने मिलकर एक एक्शन प्लान शुरू किया है। इसके तहत अगले पाँच साल में 5 लाख लोगों के बीच एक्सचेंज होगा और 50,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स जापान भेजे जाएंगे। इसमें प्रीफेक्चर्स की अहम भूमिका होगी।
पीएम मोदी ने कहा –“टोक्यो और दिल्ली नेतृत्व कर सकते हैं, लेकिन कर्नाटक और कानागावा आवाज दें, असम और आइची सपने देखें, ओडिशा और ओकायामा भविष्य बनाएं।”
प्रधानमंत्री ने राज्यपालों को भारत आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि भारत और जापान मिलकर साझा प्रगति की नई उड़ान भरें।




















