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RBI शिविर: पंचायत की जिम्मेदारी, बच्चों पर डाला बोझ – पढ़ाई ठप, सिस्टम की लापरवाही बेनकाब

बालोद, डौंडीलोहारा। भारतीय रिज़र्व बैंक के वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान (1 जुलाई से 30 सितंबर 2025) के तहत डौंडीलोहारा ब्लॉक के धनगांव में आयोजित शिविर अब लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का प्रतीक बन गया है।

कार्यक्रम में भारतीय रिज़र्व बैंक रायपुर की रीजनल डायरेक्टर Smt. Reeni Ajit, AGM Dipesh Tiwari, SBI के रीजनल मैनेजर Sanjay Prashad, CRGB रीजनल मैनेजर Vipin Chandel और लीड बैंक मैनेजर Saurabh Jain शामिल हुए।
शिविर में बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय स्टेट बैंक, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक और जिला सहकारी बैंक की भागीदारी रही।

जिम्मेदारी पंचायत की, बोझ बच्चों पर

जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के सीईओ ने 30 जुलाई 2025 को जारी ज्ञापन (क्रमांक 1335/ज.पं./वि.समा./2025-26) में सभी ग्राम पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर प्रचार-प्रसार करें और बैंक शाखाओं को सहयोग सुनिश्चित करें। लेकिन धनगांव ग्राम पंचायत ने जिम्मेदारी निभाने के बजाय कार्यक्रम स्थल के लिए शासकीय स्कूल को चुन लिया और बच्चों को ही भीड़ जुटाने का जरिया बना दिया।

स्कूल हेडमास्टर की अनुमति पर सवाल

विभागीय आदेश न होने के बावजूद स्कूल के हेडमास्टर ने बच्चों को कार्यक्रम में भेजा। कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाई से हटाकर सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर बैठा दिया गया। इतना ही नहीं, नजदीकी पूर्व माध्यमिक शाला के बच्चों को भी यहां लाया गया।

बच्चे बोले – “पढ़ाई नहीं, बस कार्यक्रम में बैठाया गया”

बच्चों ने खुद बताया कि उन्हें कक्षा में पढ़ाई नहीं कराई गई। बड़े अधिकारी दोपहर 1 बजे आने वाले थे लेकिन पहुंचे करीब 3 बजे। इस दौरान मासूम बच्चे घंटों तक कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने और भीड़ का हिस्सा बने रहे। अंत में उन्हें सिर्फ मुर्रा का पैकेट देकर लौटा दिया गया।

अधिकारियों ने ली ‘उपलब्धि’, बच्चों का भविष्य भुला

कार्यक्रम की सफलता का श्रेय बैंक अधिकारी और आयोजक लेने में पीछे नहीं रहे। लेकिन इस “उपलब्धि” के पीछे बच्चों की पढ़ाई और समय की बलि दे दी गई।
बैंकिंग योजनाओं का प्रचार-प्रसार जनहित में सकारात्मक पहल है, लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया गया, उसने पूरे सिस्टम की गैरजिम्मेदारी और लापरवाही को उजागर कर दिया है।

अब जवाबदेही कौन तय करेगा?

ग्राम पंचायत ने क्यों स्कूल और बच्चों का सहारा लिया?

शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन ने आदेश के बिना बच्चों को क्यों कार्यक्रम में भेजा?

स्थानीय प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने मासूम बच्चों को भीड़ के रूप में क्यों स्वीकार किया?

बच्चों को 5 घंटे तक बैठाने के बाद इस पैकेट को हाथों में। थमाकर वापस भेज दिए

यह सवाल अब स्थानीय प्रशासन और शासन दोनों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय जनपद पंचायत अधिकारी और शिक्षा विभाग कितनी गंभीरता से लेती है मामले पर गैर जिम्मेदार शिक्षक/अधिकारी और पंचायत सचिव के खिलाफ क्या कार्यवाही करती है ये देखने वाली बात है।

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