
संगीता सिन्हा का बड़ा बयान : “सरकार बच्चों के भविष्य से खेल रही”
संजारी-बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने कहा—“शनिवार को सुबह स्कूल लगाने की परंपरा के पीछे वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हैं। योग, व्यायाम, प्राणायाम और शारीरिक शिक्षा जैसी गतिविधियां सुबह ही संभव हैं। सरकार के इस फैसले से बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा। यह निर्णय पूरी तरह अव्यवहारिक है और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।”
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है। कभी युक्तियुक्तकरण के नाम पर स्कूलों का विलय कर बच्चों को भटकाया गया, अब शनिवार के समय में बदलाव कर उनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है।

अनिला भेड़िया का आरोप : “सरकार शिक्षा के महत्व को भूल चुकी”
डौंडीलोहारा विधायक अनिला भेड़िया ने कहा—“शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों तक सीमित करना नहीं, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास करना है। मगर सरकार का रवैया बताता है कि वह शिक्षा के महत्व को पूरी तरह भूल चुकी है। स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा की अनदेखी बच्चों के लिए खतरनाक साबित होगी।”

कांग्रेस नेताओं का एकजुट हमला
जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी, कांग्रेस महामंत्री रत्ती राम कोसमा, क्रांति भूषण साहू, युवा पार्षद सुमित शर्मा, बंटी विनोद शर्मा और अंचल प्रकाश साहू ने भी सरकार के फैसले को तानाशाही बताते हुए कड़ी आलोचना की। नेताओं का कहना है कि यह सरकार शिक्षा की जड़ों को कमजोर करने पर आमादा है।
शिक्षा व्यवस्था पर लगातार प्रहार
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सरकार के पिछले कुछ फैसले शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले रहे हैं। युक्तियुक्तकरण नीति से गांव-गांव के छोटे स्कूल बंद हुए, जिससे गरीब और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई पर गहरा असर पड़ा। अब शनिवार को स्कूल समय बदलकर बच्चों की सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस की मांग
कांग्रेस ने सरकार से तत्काल निर्णय वापस लेने की मांग की है। नेताओं ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास को देखते हुए शनिवार को स्कूल का समय पूर्ववत सुबह ही रखा जाए।




















