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बाल संस्कार केंद्र का नामकरण, बच्चों ने राधा-कृष्ण बनकर बिखेरी भक्ति की छटा

बालोद। बदलते परिवेश में छोटे-छोटे बच्चों को संस्कारित शिक्षा देने की पहल अब एक नई पहचान के साथ आगे बढ़ी है। बालोद शहर के मोखला मांझी मंदिर में संचालित बाल संस्कार केंद्र का नामकरण किया गया। इस अवसर पर हुए भव्य कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेविका श्यामकली तिवारी ने अपने करकमलों से ॐ और स्वस्तिक बनाकर केंद्र का नाम “श्री सीताराम बाल संस्कार केंद्र” रखा।

कार्यक्रम में बच्चों ने कृष्ण जन्माष्टमी की मनोहारी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। किसी ने राधा-कृष्ण बनकर रंगारंग नृत्य किया तो किसी ने भक्ति गीत, भजन और राम स्तुति प्रस्तुत की। वहीं नन्हे बच्चों ने बताया कि यहाँ आकर उन्हें संस्कार और आध्यात्मिक शिक्षा मिल रही है।

यह केंद्र पिछले दो वर्षों से संचालित है और अब अपने तृतीय वर्ष में प्रवेश कर चुका है। कार्यक्रम का संचालन विश्व हिंदू परिषद की जिला बाल संस्कार प्रमुख पूजा जैन ने किया। आयोजन में मोखला मांझी मंदिर समिति की गंगा मैया मानस मंडली, बाल मंदिर की शिक्षिका रानी योगी, समाजसेविका प्रेमलता सहित कई कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।

बच्चों को इस अवसर पर आरती पुस्तक, पेन, पेंसिल व खाद्य सामग्री वितरित की गई। पिछले वर्ष उन्हें गीता पुस्तक भी दी गई थी।

इस मौके पर ममता यदु, रानी योगी, प्रेमलता , कलिन यादव, चमेली, सरोज, सोनकली पटेल, सहित बड़ी संख्या में शहर की महिलाएं उपस्थित रहीं।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुँची वरिष्ठ समाजसेविका श्यामकली तिवारी दीदी का श्रीफल देकर सम्मान किया गया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा— “प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करें, माता-पिता की आज्ञा का पालन करें और सप्ताह में एक दिन अवश्य बाल संस्कार केंद्र की कक्षा में शामिल हों।”

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