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जर्जर स्कूल का छत गिरने से 6 मजदूर घायल, बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा..पंचायत सहित अन्य जिम्मेदारों की भी लापरवाही उजागर

बालोद। गुंडरदेही ब्लॉक के राहुद शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का जर्जर भवन प्रशासन और पंचायत की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। सोमवार को जब मजदूर पुराने स्कूल भवन को तोड़ रहे थे, तभी अचानक छत भरभराकर गिर पड़ी। हादसे में 6 मजदूर मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए। सभी को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुंडरदेही पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद 2 मजदूरों को गंभीर हालत में रेफर किया गया, जबकि 4 की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।जिनका प्राथमिक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

डॉक्टरों की रिपोर्ट

गुंडरदेही अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. ए. पी. चंद्राकर ने बताया कि घायलों का तुरंत इलाज किया गया है। इनमें से दो की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। बाकी मजदूर खतरे से बाहर हैं।

सुरक्षा मानकों की उड़ाई धज्जियाँ

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर इतनी बड़ी कार्यवाही बिना सुरक्षा इंतजाम के क्यों की गई? जिस स्कूल में पंचायत द्वारा मजदूरों से स्कूल भवन को डिस्मेंटल कराया जा रहा था उनके सुरक्षा के किसी तरह उपाय नहीं किए गए ।मजदूरों को न हेलमेट दिया गया, न ही कोई सुरक्षा उपकरण। जिस भवन को लेकर खतरे की आशंका पहले ही जताई जा चुकी थी, उसके ढहाने के काम में ज़रा भी एहतियात नहीं बरती गई। यही वजह रही कि मामूली चूक ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया।

स्कूल प्रबंधन की चिंता – बच्चों पर मंडराता खतरा

स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन ने पहले ही इस भवन की स्थिति को लेकर उच्चाधिकारियों को आवेदन दिया था। उनका कहना है कि जिस जगह मजदूर घायल हुए, वहीं पर छुट्टी के बाद छोटे-छोटे बच्चे भी खेलते हैं। अगर हादसा दिन के समय या स्कूल के भोजनावकाश के समय हुआ होता, तो इसकी चपेट में मासूम छात्र भी आ सकते थे। क्योंकि इस जर्जर बिल्डिंग के आसपास अकसर छोटे छात्र पहुंच जाते है । ऐसी स्थिति में पुराने स्कूल भवन को कवर करके डिस्मेंटल किया जाना चाहिए । इस मामले स्थानीय ग्राम पंचायत तथा डिस्मेंटल कराने वाले की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।

शिक्षक बोले – हर वक्त मंडरा रहा खतरा

राहुद शासकीय शाला के प्रधान पाठक और अन्य शिक्षक ने कहा कि यह भवन वर्षों से जर्जर हालत में है। कई बार उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद प्रशासन के निर्देशन पर पंचायत द्वारा इस  जर्जर भवन को डिस्मेंटल किया जा रहा है। घटना स्कूल खुलने के पहले घटित हुई  तथा बच्चे भी इसी परिसर में खेलते हैं, ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

बच्चों की जान से खिलवाड़ कब तक?

यह हादसा केवल 6 मजदूरों के घायल होने की घटना भर नहीं है, बल्कि यह भविष्य में होने वाले बड़े खतरे की चेतावनी है। अगर इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो किसी दिन मासूम छात्रों की जान दांव पर लग सकती है।

गंभीर सवालों के घेरे में जिम्मेदार

क्या जर्जर भवन ढहाने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य नहीं है?

पंचायत ने बिना तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी के मजदूरों से काम क्यों करवाया?

बच्चों की सुरक्षा को लेकर आखिर किसकी जिम्मेदारी तय होगी?

बहरहाल देखना होगा अब इस पूरे मामले को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग,ग्रामीण एवं पंचायत विकाश,जनपद पंचायत अधिकारी आगे क्या रुख अख्तियार करती है।क्या मामले की गंभीरता को देखते हुए इस लापरवाही पर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई  ठोस निर्णय लेती है।या इसे सामान्य घटना समझकर इसे भी नजरअंदाज करती है।

 

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