बालोद, जिले के शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोइयों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। जिला मुख्यालय के बस स्टैंड में सैकड़ों की संख्या में रसोइयों ने छत्तीसगढ़ रसोइया संघ के बैनर तले प्रदर्शन किया।
हड़ताल के पहले दिन जिले भर के कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बच्चों को भोजन नहीं मिल सका, जिससे विद्यालयों में अव्यवस्था का माहौल रहा।
ये हैं रसोइयों की तीन प्रमुख मांगे
1. कलेक्टर दर पर मानदेय निर्धारित किया जाए।
2. चुनाव के समय मोदी की गारंटी के तहत किए गए 50% मानदेय बढ़ोतरी के वादे को पूरा किया जाए।
3. स्कूलों में दर्ज संख्या कम होने पर रसोइयों को हटाया नहीं जाए।
रसोइया संघ के जिला अध्यक्ष नुकेश सोनवानी ने कहा कि “हम लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में हम उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”
इस आंदोलन का असर जिले के ग्रामीण अंचलों तक देखा गया, जहां अधिकांश स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल सका। रसोइयों का कहना है कि वे जब तक स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान नहीं मिलेगा, तब तक पीछे नहीं हटेंगे।
अब देखना होगा कि छग़ शासन इस मांगों को लेकर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यदि जल्द हल नहीं निकला तो स्कूलों की दिनचर्या और बच्चों के पोषण पर गंभीर असर पड़ सकता है।




















