गौ-तस्करी का नेटवर्क धराशायी: नागपुर से गिरफ्तारी, बालोद के चार आरोपी भी चढ़े हत्थे
साइबर तकनीक और टीमवर्क से अर्जुन्दा पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
बालोद, छत्तीसगढ़ में बढ़ती गौ-तस्करी की घटनाओं के बीच बालोद जिले की अर्जुन्दा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ तक फैले इस तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें दो आरोपी नागपुर से पकड़े गए, जबकि चार बालोद जिले के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार किए गए हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
17 जून 2025 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम डुडिया के पास एक मारुति रिट्ज कार (MH 02 BR 4917) में दो गायों को ठूंसकर भरा गया है। मौके पर पहुंची पुलिस को कार में बंधी हुई गायें मिलीं लेकिन आरोपी फरार हो चुका था। शुरुआती जांच में यह मामला गौवंश तस्करी का प्रतीत हुआ और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में लगा हाई-टेक तरीका
पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल के निर्देश और एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर व एसडीओपी राजेश बागड़े के मार्गदर्शन में, थाना प्रभारी जोगेन्द्र साहू की अगुवाई में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने ‘त्रिनयन एप’ और सीसीटीवी कैमरों की मदद से वाहन की मूवमेंट को ट्रैक किया।
राजनांदगांव से नागपुर मार्ग पर करीब 50 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिससे पता चला कि संदिग्ध वाहन नागपुर के साकोली टोल प्लाजा से गुजर चुका है।
नागपुर में दबिश, दो आरोपी गिरफ्तार
ठोस सबूतों के साथ टीम नागपुर पहुंची और कलमना थाना क्षेत्र में देर रात दबिश देकर आबिद अंसारी और विकास सिकरिट डिसुजा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दोनों ने गौ-तस्करी की साजिश कबूल की और अन्य साथियों की जानकारी दी।
बालोद से चार और आरोपी पकड़े गए
पुलिस टीम ने छत्तीसगढ़ लौटकर इस नेटवर्क से जुड़े चार और लोगों को गिरफ्तार किया—विकास गिरी गोस्वामी (उतई), फगुवा धनकर (नाहंदा), हिमांचल यादव और खेमलाल देवांगन (दोनों गुरेदा)। सभी ने पूछताछ में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।
आरोपियों को भेजा गया जेल
सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं कार से बरामद दो गायों को सुरक्षित बालोद की महावीर गौशाला में पहुंचाया गया।
टीम की रही अहम भूमिका
इस सफल ऑपरेशन में थाना प्रभारी जोगेन्द्र साहू के साथ प्रधान आरक्षक छत्रपाल डहरिया, आरक्षक दमन वर्मा, पंकज तारम और साइबर सेल से विपिन गुप्ता व भोपसिंह साहू की विशेष भूमिका रही।
यह मामला सिर्फ तस्करी का नहीं, बल्कि उस संगठित अपराध का हिस्सा है जो जानवरों की क्रूरता से जुड़ा है। पुलिस की सतर्कता और तकनीक के सही इस्तेमाल से एक बार फिर साबित हुआ कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से बचना मुश्किल है।




















