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“शादी नहीं हो रही थी… इसलिए तोड़ा शिवलिंग!” — ओरमा में आरोपी का चौंकाने वाला बयान आया सामने

ओरमा मंदिर में तोड़फोड़ करने वाला आरोपी गिरफ्तार, तालाब से निकाले गए शिवलिंग और नंदी

बालोद। जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर ग्राम ओरमा में धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली घटना में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मंदिर में शिवलिंग और नंदी प्रतिमा को तोड़कर तालाब में फेंकने वाले आरोपी की पहचान नरेंद्र निषाद पिता रामलाल निषाद के रूप में हुई है, जिसे सिटी कोतवाली पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।

गौरतलब है कि ग्राम पंचायत ओरमा के वार्ड क्रमांक एक में तालाब पार स्थित शिवमंदिर की स्थापना दो साल पहले ग्रामीणों के सहयोग से की गई थी। बीते 23 जुलाई की रात मंदिर में तोड़फोड़ कर शिवलिंग, नंदी बैल और पूजा सामग्री को तालाब में फेंक दिया गया था। इस घटना से पूरे गांव में आक्रोश फैल गया था और ग्राम समिति समेत शिवभक्तों ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा के नेतृत्व में लगातार की गई जांच के बाद आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार किया गया। शुरुआत में परिजनों ने पुलिस को बताया कि आरोपी घर पर नहीं है, लेकिन तलाशी लेने पर वह घर में ही छिपा मिला। दो दिन की पूछताछ के बाद आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने नशे की हालत में भगवान शिव से नाराज होकर यह कृत्य किया।

ग्रामीणों के अनुसार, आरोपी ने बताया कि उसकी बहनों की शादी नहीं हो रही थी और उसका खुद का विवाह भी तय नहीं हो पा रहा था, जिससे वह मानसिक तनाव में था और गुस्से में आकर उसने यह हरकत की।

सोमवार दोपहर थाना प्रभारी ने ग्राम के प्रमुखों को बुलाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद आरोपी की मौजूदगी में तालाब से मछुआरों की मदद से शिवलिंग, नंदी प्रतिमा और अन्य सामग्री को बाहर निकाला गया। पंचनामा की प्रक्रिया पूरी की गई और ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

शिकायत करने वालों में ग्राम समिति के अध्यक्ष नेम लाल साहू, सचिव प्रीतम सोनकर, कमलेश साहू, रोहित साहू, बलराम साहू, सुदामा साहू, खिलेश्वर सोनकर समेत कई श्रद्धालु शामिल हैं।

घटना के बाद ग्राम समिति ने निर्णय लिया है कि बुधवार को उसी स्थान पर दूसरे शिवलिंग की स्थापना की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन वे शांति और श्रद्धा के साथ पुनः मंदिर को संवारेंगे।

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