बालोद। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के बैनर तले बालोद जिले के सभी ब्लॉकों के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने सोमवार को नया बस स्टैंड स्थित टैक्सी स्टैंड में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह आंदोलन राज्यभर में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई चरणबद्ध आंदोलन की पहली कड़ी है, जिसका सीधा असर राजस्व विभाग के दैनिक कामकाज पर पड़ा है।
संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तब तक “संसाधन नहीं तो काम नहीं” के सिद्धांत पर आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर तहसीलदारों ने प्रदर्शन करते हुए राज्य शासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया और कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। इस आंदोलन से आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, किसान पंजीयन, भूमि संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई, भुइंया पोर्टल जैसे कार्य प्रभावित हो गए हैं।
मांगों की प्रमुख बातें:
1. तहसीलों में स्वीकृत पदों की तत्काल पदस्थापना – जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटर, भृत्य, नायब नाजिर, माल जमादार, वाहन चालक, राजस्व निरीक्षक व पटवारी शामिल हैं।
2. कार्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव – शासकीय वाहन, ड्राइवर, कार्यालय सहायक, तकनीकी उपकरण जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी से काम बाधित।
3. पदोन्नति प्रक्रिया में 50:50 अनुपात की बहाली – तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पूर्व की तर्ज पर पदोन्नति की मांग।
4. नायब तहसीलदार को राजपत्रित दर्जा देने की मांग – पूर्व में की गई घोषणा के क्रियान्वयन पर जोर।
5. न्यायिक कार्यों की सुरक्षा – तहसीलदारों को ‘न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम 1985’ के तहत संरक्षण देने की मांग और न्यायालयीन कार्यों में प्रोटोकॉल ड्यूटी से पृथक व्यवस्था।
6. आउटसोर्सिंग से स्टाफ की नियुक्ति – तकनीकी कार्यों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर की बहाली की मांग।
7. फील्ड ड्यूटी के लिए वाहन और सुरक्षा कर्मी – तहसील स्तर पर बेहतर लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने हेतु।
संघ का कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा। बालोद जिले में सोमवार को हुए प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष हेमंत पैकरा, आशुतोष शर्मा, हनुमंत श्याम, देवेंद्र नेताम, संध्या नामदेव, प्रीतम साहू, रमेश मंडावी, मुकेश गजेन्द्र, दीपक चंद्राकर, बी. रुद्र पति, धनेंद्र कश्यप सहित बड़ी संख्या में तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार शामिल हुए।
इस प्रदर्शन ने न केवल राजस्व विभाग के कामकाज को प्रभावित किया, बल्कि आम जनता को भी आवश्यक प्रमाणपत्र और सेवाओं से वंचित होना पड़ा।




















