इस ऐतिहासिक यात्रा का शुभारंभ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा: “Collab Engine एक नई पीढ़ी की नई सोच को दर्शाता है। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि हरित और जिम्मेदार भारत की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है।”

Mission LiFE से प्रेरित है यह यात्रा
इस पूरे अभियान की जड़ें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) में हैं, जो आम जनजीवन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की अपील करता है। यही विजन लेकर Collab Engine की टीम निकली है – ताकि लोगों को ये समझाया जा सके कि टेक्नोलॉजी और जिम्मेदारी साथ चल सकती है।
क्या है खास ‘Collab Engine’ में?
यह कोई आम रोड ट्रिप नहीं है। यह एक रिकॉर्ड-ब्रेकिंग और मैसेज-बेस्ड ड्राइव है, जो भारत की विविधता, ऊर्जा और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ: 10,500+ किलोमीटर की यात्रा, जो देश के 25 से अधिक शहरों को जोड़ेगी।
सिर्फ एक इलेक्ट्रिक वाहन के जरिए, पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त सफर।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की तैयारी – सबसे लंबी ईवी यात्रा के रूप में।
जन-संवाद अभियान – रास्ते में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों में कार्यशालाएँ और बातचीत।

युवाओं का मकसद साफ है: बदलाव लाना है
Collab Engine टीम में शामिल अधिकतर सदस्य 20-30 वर्ष की उम्र के युवा हैं। वे मानते हैं कि युवाओं की भागीदारी के बिना पर्यावरण बचाने की लड़ाई अधूरी है।
यात्रा के दौरान ये युवा:इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभ गिनाएंगे,सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की बातें करेंगे,और पर्यावरण बचाने के छोटे-छोटे, लेकिन असरदार उपाय लोगों तक पहुंचाएंगे।
समुदाय से सीधा संवाद
Collab Engine की सबसे खास बात है कि यह यात्रा सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर जाना नहीं है। यह एक मंच है संवाद का, जागरूकता का और जुड़ाव का।
टीम हर स्टॉप पर स्थानीय प्रशासन से संपर्क करेगी,पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुभव सुनेगी,और सबसे महत्वपूर्ण – छात्रों और युवाओं से संवाद करेगी।
#GreenIndia का संदेश, सोशल मीडिया पर भी वायरल
इस अभियान का डिजिटल पक्ष भी बेहद सशक्त है। Collab Engine की पूरी यात्रा सोशल मीडिया पर लाइव अपडेट के साथ की जाएगी – इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और X (ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस कारवां के हर मोड़ की कहानी बयां होगी।

अंत में… ये सिर्फ यात्रा नहीं, एक आंदोलन है
Collab Engine हमें याद दिलाता है कि बदलाव सिर्फ नीतियों से नहीं आता, जब जनता खासकर युवा पीढ़ी खुद आगे बढ़े तो बदलाव सुनिश्चित हो जाता है।
यह यात्रा दिखाती है कि भारत का युवा अब केवल तकनीक से जुड़ा नहीं है, वह तकनीक के साथ-साथ प्रकृति से भी जुड़ना चाहता है।
तो अगली बार जब कोई इलेक्ट्रिक वाहन आपकी सड़क पर चुपचाप गुज़र जाए – तो हो सकता है वह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि हरित क्रांति का वाहक हो।




















