दृष्टिबाधित और दिव्यांग शिक्षकों के भरोसे चल रहे स्कूल में शिक्षिका के तबादले का ग्रामीणों ने किया था विरोध, अब आदेश रद्द
बालोद। गिधाली गांव के स्कूल में शिक्षकों की कमी और अनुचित युक्तियुक्तकरण के खिलाफ ग्रामीणों द्वारा की गई तालाबंदी का प्रदेशरुचि की खबर के बाद बड़ा असर हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी एवं युक्तियुक्तकरण समिति के सचिव ने तत्काल संज्ञान लेते हुए महिला सहायक शिक्षिका धान बाई नागेन्द्र के तबादले का आदेश निरस्त कर दिया है।
गौरतलब है कि प्राथमिक शाला गिधाली में पहले से ही एक दृष्टिबाधित और एक अन्य दिव्यांग शिक्षक पदस्थ हैं। हाल ही में सहायक शिक्षिका धान बाई नागेन्द्र का स्थानांतरण युक्तियुक्तकरण नीति के तहत कर दिया गया था, जिसके विरोध में गांव के लोगों ने स्कूल में तालाबंदी कर दी थी। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जब तक शिक्षिका की वापसी नहीं होती, तब तक स्कूल का गेट नहीं खोला जाएगा।
दृष्टिबाधित और दिव्यांग शिक्षक के भरोसे स्कूल: ग्रामीणों ने स्कूल में किया किया तालाबंदी
प्रदेशरुचि की खबर बनी जनआवाज
प्रदेशरुचि ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही और बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहे खतरे को उजागर किया था। खबर के प्रकाशित होते ही जिला शिक्षा विभाग हरकत में आया और युक्तियुक्तकरण समिति की आपात समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शिक्षिका के तबादले को निरस्त किया जाए।
ग्रामीणों की जीत, बच्चों के भविष्य को राहत
ग्रामवासियों की एकजुटता और प्रदेशरुचि की सटीक पत्रकारिता ने मिलकर बच्चों के शिक्षा अधिकार की रक्षा की। अब शिक्षिका की वापसी से स्कूल में पढ़ाई सुचारू रूप से चल सकेगी और अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।
क्या बोले ग्रामीण?
ग्रामीणों ने प्रदेशरुचि को धन्यवाद देते हुए कहा कि “अगर मीडिया में हमारी बात नहीं पहुंचती, तो शायद हमारी मांग अनसुनी रह जाती। अब हम स्कूल फिर से खोलने को तैयार हैं।”
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्थानीय मीडिया की सशक्त भूमिका से न केवल प्रशासन को जवाबदेह बनाया जा सकता है, बल्कि नीतियों में सुधार और जमीनी समस्याओं का समाधान भी संभव है।
प्रदेशरुचि आगे भी जमीनी मुद्दों को उठाने और आम जनता की आवाज बनने के अपने संकल्प पर कायम रहेगा




















