Skip to main content

प्रदेश रूचि

दृष्टिबाधित और दिव्यांग शिक्षक के भरोसे स्कूल: ग्रामीणों ने स्कूल में किया किया तालाबंदी

बालोद के डौंडी ब्लॉक में दो स्कूलों में शिक्षकों की कमी के खिलाफ गूंजा विरोध, परिजनों ने बच्चों के साथ स्कूल गेट पर डाला डेरा

बालोद, डौंडी। शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के दो सरकारी स्कूलों में ग्रामीणों ने शाला प्रवेशोत्सव के पहले ही दिन तालाबंदी कर दी। यह विरोध प्राथमिक शाला गिधाली और धोतिमटोला (आश्रितगांव दारूटोला) में देखने को मिला, जहां ग्रामीणों ने अपने बच्चों के साथ स्कूल गेट के बाहर धरना दिया और शिक्षकों की भारी कमी पर सवाल उठाए।

शिक्षक नहीं, तो स्कूल नहीं: युक्तियुक्तकरण पर भड़के ग्रामीण

धोतिमटोला में जहां शिक्षक की कमी को लेकर गेट पर ताला जड़ा गया, वहीं गिधाली शाला में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां पदस्थ दो शिक्षक — एक दृष्टिबाधित और एक अन्य दिव्यांग हैं। हाल ही में एक महिला शिक्षक का तबादला कर दिया गया, जिससे स्कूल की शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर की जा रही कटौती बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। पढ़ाई के साथ-साथ अन्य जिम्मेदारियों को दो विशेष योग्यजन शिक्षकों के भरोसे छोड़ देना शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही है।

ग्रामीणों की प्रमुख बातें:

भागी राम साहू, स्थानीय ग्रामीण ने कहा “बच्चों की पढ़ाई का मज़ाक बन गया है… जब तक एक सामान्य शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती, स्कूल नहीं खुलने देंगे।”

रेखा मिश्रा, ग्रामीण महिला ने कहा “एक दृष्टिबाधित और दिव्यांग शिक्षक से सारी जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद करना गलत है। बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है।”

मिथलेश निरोटी, जिला पंचायत सदस्य ने साफ तौर पर कहा “ये बहुत गंभीर मामला है। विभाग को तत्काल संज्ञान लेकर शिक्षकों की बहाली करनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था पर यह एक बड़ा सवालिया निशान है,एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे करते नजर आए तो दूसरी तरफ बालोद जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में प्रवेशोत्सव के पहले ही दिन शिक्षको की कमी के चलते स्कूल में तालाबंदी काफी गंभीर विषय है और सरकार के दावों को पोलखोलने वाली है।

क्या बोले अधिकारी?

इस मामले में शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी डीपी कोसरेे से बात की गई तो उनके द्वारा दोनो स्कूलों के प्रबंधन से बात हो गई और अब किसी तरह का विरोध नही होने की बात कहते नजर आए जबकि मामले पर प्राप्त जानकारी के अनुसार धोतिमटोला में एक शिक्षक की नियुक्ति के आश्वासन पर तालाबंदी स्थगित किया गया वही गिधाली प्राथमिक शाला में ग्रामीणों का साफ कहना है जब तक स्कूल में एक सामान्य शिक्षक की नियुक्ति नहीं होती तब तक स्कूल बंद रहेगा।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण अंचलों की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है। जहां सरकार शाला प्रवेशोत्सव जैसे आयोजनों से शिक्षा को उत्सव बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं शिक्षक विहीन स्कूलों में ताले और धरने उस उत्सव पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!