बालोद, जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद ने जानकारी दी है कि युक्तियुक्तकरण 2025 के अंतर्गत अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग की प्रक्रिया 2 एवं 3 जून को जिला पंचायत कार्यालय, बालोद में संपन्न होगी। इसके लिए विस्तृत समय-सारणी भी जारी कर दी गई है।
2 जून को
सुबह 10:00 – 11:30 बजे: व्याख्याता (ई संवर्ग)
11:30 – दोपहर 1:00 बजे: व्याख्याता (टी संवर्ग)
1:30 – 3:30 बजे: प्रधान पाठक माध्यमिक शाला / शिक्षक (ई संवर्ग)
4:00 बजे से आगे: प्रधान पाठक माध्यमिक शाला / शिक्षक (टी संवर्ग)
3 जून को
सुबह 10:00 – 1:30 बजे: प्रधान पाठक प्राथमिक शाला / सहायक शिक्षक (ई संवर्ग)
1:30 बजे से आगे: प्रधान पाठक प्राथमिक शाला / सहायक शिक्षक (टी संवर्ग)
जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित शिक्षकों से नियत तिथि, समय एवं स्थान पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का आग्रह किया है।
शिक्षकों में गहराया असंतोष, पारदर्शिता पर उठे सवाल
दूसरी ओर, शिक्षक संगठनों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। शिक्षक साझा मंच के जिला संचालक जितेंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा:
> “हद है ये तो… आदेश तो जारी हो गया है, लेकिन यह तक स्पष्ट नहीं है कि कौन शिक्षक ‘अतिशेष’ की श्रेणी में आता है। जब सूची ही सार्वजनिक नहीं की गई है, तो काउंसलिंग में कौन शामिल होगा?”
उनका आरोप है कि जिले के 354 विद्यालयों के युक्तियुक्तकरण की सूची DPI द्वारा जारी की जा चुकी है, फिर भी संबंधित विद्यालयों के नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि “कहीं यह लापरवाही नहीं, बल्कि किसी अंदरूनी योजना के तहत कुछ खास शिक्षकों को लाभ पहुंचाने की कोशिश तो नहीं?”
‘युक्तियुक्तकरण की आड़ में स्कूल न बंद करें’
शिक्षकों का मानना है कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर सरकारी विद्यालयों को बंद करने और शिक्षकों के पदों को कम करने की कोशिश की जा रही है, जो ग्रामीण एवं गरीब बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। साझा मंच की मांग है कि केवल शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में ही नियुक्ति की जाए, वो भी उन्हीं शिक्षकों की जिन्हें स्वीकृत पदों की तुलना में अधिक पद प्राप्त हुए हैं।
> “हम सरकार की तानाशाही नहीं चलने देंगे। शिक्षक काउंसलिंग का विरोध करेंगे और सरकारी स्कूलों व बच्चों के भविष्य को बचाने का हरसंभव प्रयास करेंगे”, – जितेंद्र शर्मा, जिला संचालक, शिक्षक साझा मंच
जहां एक ओर प्रशासन द्वारा शिक्षकों की पुनर्व्यवस्था हेतु कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की शिकायतें इस ओर संकेत करती हैं कि प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं संवाद की कमी है। यदि समय रहते प्रशासन शिक्षक संगठनों की आपत्तियों का संज्ञान नहीं लेता, तो आने वाले दिनों में इस पर विवाद और गहरा सकता है।





















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