संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूल आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में पेयजल और बिजली जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में 16 जून से स्कूल खोलने का निर्णय विद्यार्थियों और शिक्षकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने कहा कि छोटे बच्चे गर्मी और उमस के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। तेज धूप के बीच नियमित समय पर स्कूल संचालन उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले 1 जुलाई से स्कूल खुलने की परंपरा इसलिए उपयुक्त मानी जाती थी क्योंकि तब तक मानसून की दस्तक से मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल हो जाता था और पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित रहती थी।
संघ ने मांग की कि गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूलों के शुरुआती दिनों में प्रातःकालीन पाली में कक्षाएं संचालित की जाएं, क्योंकि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक का समय वर्तमान मौसम परिस्थितियों में व्यवहारिक नहीं है। सुविधाविहीन विद्यालयों में इस अवधि तक विद्यार्थियों और शिक्षकों का रहना काफी कष्टदायक हो सकता है।

प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने बताया कि शिक्षामंत्री को बुके भेंट कर संगठन की मांगों से अवगत कराया गया। मंत्री ने बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए विषय पर उचित निर्णय लेने तथा मांगों पर पुनर्विचार का भरोसा दिलाया।
प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन ने शिक्षामंत्री के जन्मदिन पर उनके उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर प्रगति की कामना करते हुए प्रदेश के विद्यार्थियों के हित में जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया।
शालेय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने सरकार से अपील की है कि भीषण गर्मी और उमस की परिस्थितियों को देखते हुए स्कूल खुलने की तिथि बढ़ाने तथा शाला समय में संशोधन को लेकर शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो सके।




















