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प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, हरियाणा DGP से मांगी रिपोर्ट

दिल्ली/हरियाणा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अशोका विश्वविद्यालय, हरियाणा के एक प्रोफेसर की गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे मानवाधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है, और एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

क्या है मामला?

20 मई 2025 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अशोका विश्वविद्यालय (एक डीम्ड यूनिवर्सिटी) में कार्यरत एक प्रोफेसर को हरियाणा पुलिस द्वारा कथित रूप से कुछ “आपत्तिजनक टिप्पणियों” और “भड़काऊ सामग्री” को लेकर गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफेसर को बिना पूर्व सूचना या वारंट के उनके निवास से हिरासत में लिया गया, और कई घंटे तक थाने में रखा गया, जहाँ उन्हें वकील से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

स्थानीय पुलिस का दावा है कि प्रोफेसर पर आईपीसी की कुछ धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने इस गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

NHRC की प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया यह मामला मानवाधिकारों के हनन का प्रतीत होता है। आयोग ने कहा है कि यदि गिरफ्तारी गैर-कानूनी तरीके से की गई है और हिरासत के दौरान प्रोफेसर के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो यह भारत के संविधान और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।

आयोग ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया, उसके कानूनी आधार और हिरासत के दौरान बरती गई प्रक्रियाओं का पूरा विवरण शामिल हो।

शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद से देशभर के शिक्षाविदों, छात्रों और सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त है। कई विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और स्वतंत्र विचारकों ने इस गिरफ्तारी की निंदा की है और इसे “शैक्षणिक स्वतंत्रता” पर सीधा हमला बताया है। सोशल मीडिया पर भी #StandWithProfessor ट्रेंड कर रहा है।

आगे की राह

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हरियाणा पुलिस आयोग को क्या जवाब देती है और क्या यह गिरफ्तारी न्यायिक मानकों पर खरी उतरती है। आयोग की रिपोर्ट और इसकी अनुशंसाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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