प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले मोदी की गारंटी के तहत 57,000 शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विधानसभा में 33,000 शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सत्र 2023-24 में पूरी करने की घोषणा की थी। लेकिन सरकार बनने के डेढ़ साल बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। उल्टे, अब स्कूलों को बंद करने की नीति बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात कर रही है।

प्रशिक्षित युवा बोले – वादाखिलाफी से टूटा विश्वास
संघ की दुर्ग संभाग अध्यक्ष पूजा ने कहा कि –
“हमने भाजपा पर भरोसा कर चुनाव में समर्थन दिया, लेकिन अब जब रोजगार की बारी आई तो सरकार ने वादा भूलकर युक्तियुक्तकरण की आड़ में स्कूल ही बंद करने शुरू कर दिए। यह न केवल रोजगार का हनन है बल्कि शिक्षा के अधिकार कानून और राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी उल्लंघन है।”
वहीं गुंडरदेही ब्लॉक अध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि –
“हजारों युवा वर्षों से शिक्षक बनने की योग्यता पूरी करने के बाद भी नौकरी के इंतजार में हैं। अब जब उम्मीद थी कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी, तब स्कूल ही बंद किए जा रहे हैं। यह नीति दूरदराज के ग्रामीण बच्चों के भविष्य को भी अंधकार में डाल रही है।”

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और RTE अधिनियम का उल्लंघन
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल सेटअप 2008 में बदलाव कर जिस तरह से विद्यालयों को बंद करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह न केवल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बल्कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का भी उल्लंघन है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है और इस निर्णय से स्थिति और भी खराब हो जाएगी।
आंदोलन को मिलेगी प्रदेशव्यापी गति
प्रशिक्षित युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सरकार द्वारा शिक्षक भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की जाती और युक्तियुक्तकरण नीति को वापस नहीं लिया जाता, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। अभी बालोद से यह लड़ाई शुरू हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में लाखों प्रशिक्षित बेरोजगार युवा प्रदेशभर में सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।




















