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DMF फंड से जारी निविदा में जल्दबाजी..बालोद में शिक्षा विभाग की निविदा प्रक्रिया पर बवाल, ठेकेदारों ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

“बालोद में शिक्षा विभाग की निविदा प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल: स्थानीय ठेकेदारों में नाराजगी, पारदर्शिता की मांग तेज

बालोद – बालोद जिले में शिक्षा विभाग द्वारा खनिज न्यास मद (DMF) से वित्तपोषित पॉलीकार्बोनेट डोम शेड निर्माण, ग्राफिटी पेंटिंग और स्पोर्ट्स यूसेज लाइट्स की आपूर्ति एवं स्थापना के लिए जारी निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ठेकेदारों और कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने इस प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए इसमें पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

सूत्रों के अनुसार, निविदा बिक्री की अंतिम तिथि 19 मई 2025 निर्धारित की गई, जबकि निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 20 मई 2025 सुबह 11:00 बजे रखी गई है। यानी इच्छुक निविदाकर्ताओं को निविदा दस्तावेज खरीदने से लेकर उसे तैयार कर पंजीकृत डाक के माध्यम से जमा करने के लिए मात्र एक दिन का समय मिला। यह अवधि न केवल अपर्याप्त है बल्कि तकनीकी रूप से अव्यवहारिक भी मानी जा रही है।

जानकारों का आरोप है कि:
यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ की सामान्य वित्तीय नियमावली और निविदा प्रणाली के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है, जिसमें स्पष्ट रूप से पर्याप्त समयावधि, प्रचार और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का प्रावधान होता है। अल्पकालिक सूचना देकर निविदा प्रक्रिया में इच्छुक प्रतिभागियों को प्रभावी भागीदारी से वंचित करना पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

स्थानीय ठेकेदारों में नाराजगी:
स्थानीय कांट्रेक्टरों का कहना है कि कई लोगों को निविदा की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जबकि कुछ को निविदा फॉर्म लेने के बाद बड़े अधिकारियों के दबाव में उसे वापस करने को कहा गया। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें निविदा जमा न करने के लिए फोन पर दबाव डाला गया, जो प्रशासनिक निष्पक्षता पर गहरी चिंता का विषय है।

कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन का ऐलान:
मामले में स्थानीय कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने जिलाधीश कार्यालय में मंगलवार को लिखित शिकायत देने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद ‘बंटी’ शर्मा ने कहा, “निविदा में जो नियम व शर्तें निर्धारित की गई हैं, वे पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं। हम चाहते हैं कि प्रक्रिया को पुनः प्रकाशित कर समुचित समयावधि के साथ निष्पक्ष रूप से दोबारा कराया जाए।” उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार को संघ के सदस्य बैठक कर मामले पर सामूहिक निर्णय लेंगे।

पूर्व में भी उठ चुके हैं सवाल:
यह पहली बार नहीं है जब बालोद जिले में विभागीय निविदाओं को लेकर सवाल उठे हों। पूर्व में भी खनिज न्यास मद से वित्तपोषित कार्यों में अनियमितता के आरोप लगे हैं। अब एक बार फिर से जिला शिक्षा विभाग की इस निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठना प्रशासन के लिए चिंताजनक संकेत हैं।

पूरा मामला पारदर्शिता और निष्पक्षता जैसे मूलभूत प्रशासनिक सिद्धांतों की परीक्षा बन गया है। यदि समय रहते प्रक्रिया की समीक्षा नहीं हुई तो यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे सभी आरोपों की जांच कर निष्पक्ष और समावेशी निविदा प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

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