बालोद, छत्तीसगढ़ – इन दिनों बालोद ब्लॉक के अंतर्गत विभिन्न ग्रामों में ग्रीष्मकालीन धान की कटाई का कार्य तेज़ी से जारी है। आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे चैन हार्वेस्टर और अन्य हार्वेस्टर मशीनों की मदद से खेतों में कटाई तो आसान हो गई है, लेकिन इसके बाद खेतों से धान की ढुलाई के दौरान उत्पन्न समस्या आम नागरिकों के लिए एक नई मुसीबत बन गई है।
कटाई के बाद धान ट्रैक्टर-ट्रॉली से खेतों से मुख्य सड़कों तक पहुँचाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में ट्रॉली के पहियों से खेत की गीली मिट्टी सड़क पर फैल रही है, जिससे सड़कें कीचड़युक्त और फिसलन भरी हो गई हैं। रविवार रात बघमरा मार्ग में निम पेड़ से लेकर बघमरा पुल तक की सड़क गीली मिट्टी से भर गई थी, जिससे दर्जनों दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना के शिकार हो गए।
आमजनों की जान जोखिम में
गौरतलब है कि इस मार्ग से एक दर्जन से अधिक गाँवों के लोग प्रतिदिन बालोद आते-जाते हैं। यह मार्ग ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन कीचड़युक्त होने से अब यह मार्ग एक खतरा बन गया है। रविवार रात एक स्कूटी सवार कीचड़ में फिसल गया। सौभाग्य से गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई वृद्ध, महिला या बच्चा गिरता तो मामला बेहद गंभीर हो सकता था।
गर्म धूप से मिट्टी सूखी, लेकिन बारिश बनी डर का कारण
आज की तेज धूप के कारण मिट्टी भले ही सूख गई है, परंतु यदि अचानक बारिश हो गई तो सड़क फिर से फिसलन भरी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में साइकिल, मोटरसाइकिल चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों और सब्जी विक्रेताओं के लिए दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाएगा।
जनता की मांग: जिम्मेदारी तय हो
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि ट्रैक्टर और हार्वेस्टर चालकों को निर्देशित किया जाए कि वे खेतों की मिट्टी सड़कों पर न फैलाएँ। यदि मिट्टी फैलती है तो संबंधित मालिकों की जिम्मेदारी तय की जाए और सड़क की तत्काल सफाई सुनिश्चित हो। साथ ही, ग्राम पंचायतों को इस विषय में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है ताकि सड़क की नियमित सफाई सुनिश्चित की जा सके।
यह समस्या केवल एक व्यक्ति या एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सार्वजनिक सुरक्षा, सुविधा और अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह शीघ्र हस्तक्षेप करे और ऐसे कदम उठाए जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित और सुगम आवागमन का अधिकार मिल सके।
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