नई दिल्ली, देश की खेती को नया रूप देने और किसानों को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए अब ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ शुरू किया जा रहा है, जो 29 मई से 12 जून 2025 तक पूरे देश में चलेगा। इसी को लेकर आज दिल्ली से केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की, जिसमें छत्तीसगढ़ ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई और अभियान को पूरी ताकत से आगे बढ़ाने का भरोसा दिया।
इस अभियान का मकसद सिर्फ बातें करना नहीं, बल्कि सीधा एक्शन है। पहली बार ऐसा होगा जब वैज्ञानिकों की टीमें खुद गांवों में जाकर किसानों को खेती की नई तकनीक सिखाएंगी, और उनकी समस्याएं मौके पर सुनकर हल भी सुझाएंगी।

क्या है ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’?
यह एक देशव्यापी मिशन है जिसका मकसद है किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती के लिए तैयार करना।
इसके तहत 2,170 वैज्ञानिकों की टीमें बनाई गई हैं, जो देशभर के गांवों में जाकर किसानों को ट्रेनिंग देंगी।
टीमों में कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और तकनीकी अधिकारी शामिल होंगे, जो सीधे खेतों में जाकर किसानों से बात करेंगे।
वैज्ञानिकों और किसानों के बीच दो तरफा संवाद होगा – वैज्ञानिक तकनीक बताएंगे और किसान अपने अनुभव व समस्याएं साझा करेंगे।

फोकस सिर्फ उत्पादन नहीं, फायदा भी
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सिर्फ खेती करें नहीं, फायदे की खेती करें। उन्होंने कहा कि यह देश, यह माटी, और ये किसान हमारे अपने हैं – और इनकी आय बढ़ाना ही असली देशसेवा है। पिछले साल की रिकॉर्ड फसल को उन्होंने राज्यों के साझा प्रयासों का नतीजा बताया और कहा कि अब रुकना नहीं है, बल्कि इसी रफ्तार से आगे बढ़ना है।
क्यों है ये अभियान खास?
“लैब टू लैंड”: यानी जो टेक्नोलॉजी और रिसर्च लैब में तैयार हो रही है, उसे सीधा किसानों तक ले जाना।
सामूहिक भागीदारी: केंद्र और राज्य सरकारों के कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान एक साथ काम करेंगे।
सीधा असर: किसानों को फायदा तुरंत मिलेगा – प्रशिक्षण, समाधान और तकनीक एक ही जगह पर।

छत्तीसगढ़ की भागीदारी से मिलेगी नई ऊर्जा
बैठक में छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग ने इस अभियान को पूरे राज्य में असरदार ढंग से लागू करने का भरोसा दिया। राज्य सरकार पहले से ही किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर काम कर रही है, और इस अभियान से उसे नई ताकत मिलेगी। छग के कृषि मंत्री ने यह साफ किया कि खरीफ की बुआई से पहले राज्य में गांव-गांव अभियान चलाकर किसानों को जोड़ा जाएगा, ताकि एक भी किसान पीछे न छूटे।
किसानों के लिए सीधा संदेश
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “किसानों की सेवा ही मेरे लिए पूजा है। ये अभियान किसी योजना की तरह नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन की तरह चलाया जाएगा। हम सबको मिलकर इसे सफल बनाना है।”
बैठक में कौन-कौन रहा शामिल?
कृषि मंत्रालय के सचिव देवेश चतुर्वेदी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट

सभी राज्यों के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों के जीवन को बदलने की एक ठोस शुरुआत है। जब वैज्ञानिक गांव में आएंगे, खेतों में बैठकर हल बताएंगे और किसान सीधी मदद पाएंगे – तब जाकर खेती असल में बदलेगी। छत्तीसगढ़ समेत पूरा देश इस नए युग की ओर बढ़ चला है।




















