हर साल नवंबर से मई तक चलने वाले इस ऑपरेशन का मकसद ओडिशा के गहिरमाथा बीच सहित अन्य तटीय इलाकों में आने वाले लाखों ओलिव रिडले कछुओं को सुरक्षित घोंसले देने का होता है। इन कछुओं की खासियत यह है कि ये एक ही स्थान पर सामूहिक रूप से अंडे देने आते हैं — जिसे अरिबाडा कहा जाता है। लेकिन मानवीय हस्तक्षेप, अवैध मछली पकड़ने और प्रदूषण के चलते इनका जीवन हर साल संकट में आ जाता है।

ऑपरेशन की अंदरूनी कहानी क्या कहती है?
इस विशेष मिशन के तहत भारतीय तटरक्षक बल ने इस साल अब तक 5,387 सतही गश्ती उड़ानें और 1,768 हवाई निगरानी मिशन अंजाम दिए हैं। इसके चलते न केवल 366 अवैध मछली पकड़ने वाली नावों को हिरासत में लिया गया, बल्कि तट के आसपास सुरक्षा भी इतनी सख्त रही कि कछुओं का प्राकृतिक चक्र बिना किसी बाधा के पूरा हो सका।

तटरक्षक बल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने स्थानीय मछुआरा समुदायों के साथ भी संवाद स्थापित कर कछुआ बहिष्करण उपकरणों (TEDs) के उपयोग को बढ़ावा दिया। साथ ही, गैर-सरकारी संगठनों के साथ संरक्षण आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी काम किया, जिससे दीर्घकालिक संरक्षण प्रयासों को ज़मीनी समर्थन मिला।
रहस्य से भरपूर, लेकिन उम्मीद से भरा मिशन
इस ऑपरेशन की सफलता इस बात की मिसाल है कि अगर संरक्षण को मिशन मोड में लिया जाए तो विलुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा मुमकिन है। रुशिकुल्या तट पर इस साल जो सामूहिक अंडे देना दर्ज हुआ, वह तटरक्षक बल की कठोर निगरानी, हवाई गश्त और सामुदायिक सहभागिता का नतीजा है — एक ऐसा संयोजन जो हर समुद्री जीवन प्रेमी के लिए प्रेरणादायक है।

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