रक्सौल में मानव तस्करी की कोशिश नाकाम: आरपीएफ ने चार नाबालिग नेपाली लड़कियों को बचाया, तस्कर गिरफ्तार
रक्सौल, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक बार फिर अपने त्वरित और समन्वित कार्रवाई से मानव तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। 13 मई की सुबह, रक्सौल रेलवे स्टेशन पर ‘ऑपरेशन आहट’ के तहत चलाई गई कार्रवाई में सत्याग्रह एक्सप्रेस (15273) से चार नेपाली मूल की नाबालिग लड़कियों को मानव तस्करों से बचाया गया।
इस अभियान में RPF के साथ रक्सौल राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), रेलवे चाइल्डलाइन-रक्सौल, और गैर-सरकारी संगठन प्रयास किशोर सहायता केंद्र की संयुक्त टीम शामिल रही। पीड़ित लड़कियों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच है। प्रारंभिक जांच से यह पता चला कि उन्हें झूठे नौकरी के वादों और गुमशुदा रिश्तेदार को खोजने के बहाने नेपाल से भारत लाया जा रहा था। उनके परिवार को इस यात्रा की कोई जानकारी नहीं थी।
सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से एक तस्कर को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया और सभी लड़कियों को बाल कल्याण अधिकारियों को सौंप दिया गया। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम और बाल श्रम निषेध अधिनियम के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक मनोज यादव ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह घटना मानव तस्करी के विरुद्ध सतर्कता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने यात्रियों से आग्रह किया कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल रेलवे हेल्पलाइन 139 पर दें।
‘ऑपरेशन आहट’ के अंतर्गत RPF ने वर्ष 2024-25 में अब तक 929 पीड़ितों को बचाया है, जिनमें 874 बच्चे शामिल हैं, और 274 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। मानव तस्करी रोकथाम के लिए RPF ने रेलवे नेटवर्क में समर्पित इकाइयों की स्थापना की है। इसके अतिरिक्त, 2024 में RPF और राष्ट्रीय महिला आयोग के बीच हुए सहयोग समझौते ने एजेंसियों के बीच समन्वय और पीड़ित सहायता प्रणाली को और अधिक सशक्त किया है।
आपको बतादे इस तरह के अभियानों के माध्यम से RPF न केवल रेलवे परिसरों को सुरक्षित बना रहा है, बल्कि समाज के सबसे असुरक्षित वर्ग—बच्चों—की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।




















