बीते एक वर्ष में बालोद जिले ने विकास, नवाचार, जनकल्याण और सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सक्रियता के साथ कार्य करते हुए बालोद को नई दिशा देने का प्रयास किया है।
जनता से सीधा संवाद, समाधान पर फोकस
कलेक्टर मिश्रा के कार्यकाल की सबसे बड़ी विशेषता जनता से सीधा संवाद रही। जनदर्शन, समय-सीमा बैठकों और विभागीय समीक्षा के माध्यम से शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। आम नागरिकों में यह भरोसा मजबूत हुआ कि प्रशासन उनके लिए सुलभ और जवाबदेह है।

स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा विस्तार
बीते एक वर्ष में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। जिले को नई एंबुलेंस सेवाएं मिलीं, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक आपात चिकित्सा सुविधा पहुंची। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिली।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मॉनिटरिंग, एएनसी जांचों में वृद्धि और कुपोषण नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य हुए। “हॉट कुक मील” जैसी पहल ने गर्भवती और शिशुवती महिलाओं को पोषण सुरक्षा प्रदान की।
शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर विशेष ध्यान
कलेक्टर मिश्रा ने शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए युवाओं के भविष्य निर्माण पर जोर दिया। जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नीट और जेईई कोचिंग जैसी पहल शुरू की गई, ताकि ग्रामीण और सामान्य परिवारों के बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकें।
यह प्रयास बालोद के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण बना सफलता का आधार
महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया। बिहान समूहों से जुड़ी महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ीं और कई महिलाओं ने “लखपति दीदी” बनने की दिशा में सफलता हासिल की।
महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में भी जिला प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई।
जल संरक्षण, हरियाली और ऊर्जा पर फोकस
बालोद जिले में पर्यावरण संरक्षण और भविष्य उन्मुख विकास को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण, पौधारोपण और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में अभियान चलाए गए। प्रशासन ने सतत विकास को स्थानीय जरूरतों से जोड़ते हुए कार्य किया।
सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था में सुधार
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” जैसे जागरूकता अभियान चलाए गए। यातायात नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती गई। वहीं नशे और अवैध कारोबार के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई कर सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

समन्वय से विकास की नई मिसाल
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों, विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। यही कारण रहा कि कई योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध और प्रभावी ढंग से हो सका।
सेवा, संवेदना और सुशासन का एक वर्ष
राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस पर बालोद जिले में यह कहा जा सकता है कि बीते एक वर्ष में प्रशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की जरूरतों और अपेक्षाओं से जुड़ा।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का एक वर्ष का कार्यकाल यह संदेश देता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, जनता का विश्वास साथ हो और विकास की स्पष्ट सोच हो, तो बदलाव संभव है।
राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस के अवसर पर बालोद जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि जिले को ऐसा नेतृत्व मिला, जिसने सेवा को प्राथमिकता, विकास को लक्ष्य और जनता को केंद्र में रखकर कार्य किया। एक वर्ष में बनी उपलब्धियों की यह श्रृंखला आने वाले समय के लिए और बेहतर संभावनाओं का संकेत है।




















