मां ने बताई समस्या, सरपंच पहुंचीं घर
ओमप्रकाश की मां रमतुला सोनकर ने दो दिन पहले ग्राम पंचायत पहुंचकर सरपंच मंजूलता परस साहू को अपनी व्यथा सुनाई थी। मामले की गंभीरता को समझते हुए सरपंच अगले ही दिन ओमप्रकाश के घर पहुंचीं और उनकी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ओमप्रकाश से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका हालचाल जाना और पूरी जानकारी प्राप्त की।

शिक्षित हैं, लेकिन चलने-फिरने में असमर्थ
ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की है, लेकिन शारीरिक रूप से चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। अधिकतर समय उन्हें कुर्सी या बिस्तर पर ही बिताना पड़ता है। उन्होंने शासन की कई योजनाओं के लिए आवेदन भी किए, लेकिन गरीबी रेखा में नाम न होने के कारण हर बार उनका नाम कट गया।
सरपंच का भरोसा: “हर संभव मदद करूंगी”
सरपंच मंजूलता परस साहू ने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से कलेक्टर से मिलकर इस विषय को उठाऊंगी। ओमप्रकाश जैसे जरूरतमंद युवाओं तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि उन्हें उनका हक मिल सके।” इस संबंध में सरपंच ने जिला कलेक्टर को पत्र प्रेषित कर ओमप्रकाश को योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग करेंगे ।
परिवार है दुखी, सिस्टम पर उठ रहे सवाल
ओमप्रकाश के परिजन शासन की योजनाओं से वंचित होने पर दुखी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे जरूरतमंद लोगों को भी यदि योजना से बाहर रखा जाएगा तो फिर इन योजनाओं का औचित्य क्या है?
क्या सिस्टम जरूरतमंदों तक पहुंच पा रहा है?
यह मामला एक बड़ा सवाल उठाता है—क्या सरकारी योजनाएं वाकई उन तक पहुंच रही हैं जिन्हें उनकी सबसे ज़्यादा जरूरत है? ओमप्रकाश जैसे दिव्यांगों को योजनाओं से बाहर रखना न केवल असंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है।




















