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असमंजस के बीच सजा होली बाजार, 50 से 1000 तक पिचकारी और 100 से 2200 तक नगाड़े

बालोद। होली पर्व को लेकर जिला मुख्यालय का बाजार रंग-बिरंगी रौनक से सज गया है। बाजार में गुलाल, पानी में घुलने वाले रंग, आकर्षक पिचकारियां, बच्चों के मुखौटे और पारंपरिक नगाड़ों की दुकानें सज चुकी हैं। हालांकि इस वर्ष होलिका दहन की तिथि को लेकर बने असमंजस के कारण खरीदारी की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी…

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आज होलिका दहन..लेकिन बालोद जिले के इन गांवों में क्यों नहीं जलाई जाती होली..पढ़े ये खास खबर

बालोद- जिले के झलमला और चंदनबिरही में होलिका दहन नहीं किया जाता। ग्राम झलमला में 107 सालों से होलिका नहीं जलाई जा रही। यहां होलिका जलाने का रिवाज बुजुर्गों ने शुरू किया है। जिसका पालन अभी तक युवा पीढ़ी करते रहे हैं। इसे परंपरा कहे या अंधविश्वास लेकिन धार्मिक स्थल गंगा मैया के कारण प्रसिद्ध…

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*अंचल में अंडी पेड़ के पूजन के बाद आज से होलिका दहन के लिए करेंगे लकड़ी एकत्र…अंडी पेड़ पूजन का क्या है महत्व*

बालोद-गुरुवार को माघ महीने की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी के रूप में जिले में बड़े धूमधाम से मनाया गया। बसत पंचमी के अवसर पर जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में होलिका दहन के लिए अंडे का पेड़ गाड़कर और पूजा अर्चना कर परंपरा निभाए गई,इसके साथ ही होलिका के लिए लकड़ियां एकत्रित करने का…

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