बालोद। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को फॉर्म 20A और 21A के तहत प्रतिबंधित औषधि लाइसेंस देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे जनस्वास्थ्य, रोगी सुरक्षा और देश की औषधि नियंत्रण व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।
AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और राष्ट्रीय महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि दवाइयाँ जीवनरक्षक उत्पाद हैं और इन्हें कृषि रसायनों की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं का वितरण केवल प्रशिक्षित और पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी में ही होना चाहिए। किसी भी प्रकार की शिथिलता जनस्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है।
संगठन के अनुसार ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के नियम 62A और 62B को ऐतिहासिक रूप से केवल अपवादस्वरूप परिस्थितियों के लिए बनाया गया था। वर्तमान में देश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर्स और पंजीकृत फार्मासिस्ट उपलब्ध हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित औषधि लाइसेंस जारी करना न तो आवश्यक है और न ही उचित।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि PACS संस्थाएं मुख्यतः उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि रसायनों के व्यापार से जुड़ी होती हैं। ऐसे परिसरों में दवाओं का भंडारण क्रॉस-कंटैमिनेशन और अनुचित स्टोरेज का खतरा बढ़ा सकता है, जिससे सीधे तौर पर रोगी सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। संगठन ने यह भी आगाह किया कि यदि गैर-फार्मासिस्ट द्वारा दवाओं का वितरण किया गया तो एंटीबायोटिक के दुरुपयोग, दवा संबंधी त्रुटियों और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी राष्ट्रीय चुनौतियाँ और गंभीर हो सकती हैं।
AIOCD ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से आग्रह किया है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए और ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 की मूल भावना तथा उद्देश्यों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि PACS को प्रतिबंधित औषधि लाइसेंस देने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए और नियम 62A एवं 62B के अंतर्गत राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को इस संबंध में कोई सामान्य परामर्श जारी नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी परिसर में और पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी में ही संचालित किए जाने की मांग भी की गई है।
AIOCD ने बताया कि संगठन देशभर के 12.40 लाख से अधिक औषधि विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित और विधिसम्मत औषधि सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन तथा बालोद जिला दवा विक्रेता संघ ने भी इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए सरकार से इसे जनहित में तत्काल निरस्त करने की मांग की है। बालोद जिला दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत साहू और सचिव पवन साहू ने कहा कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस निर्णय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।




















