
दुकानदारों का कहना है कि लोगों ने धीरे-धीरे खरीदारी शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में रौनक बढ़ने की उम्मीद है। बाजार में इस बार भी बच्चों के लिए खास आकर्षण देखने को मिल रहा है। गन, पिस्तौल, बोतल और सानिया वाली पिचकारियां 50 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक उपलब्ध हैं। मिकी माउस, शेर, लोमड़ी, खरगोश और शक्तिमान जैसे मुखौटे 10 से 50 रुपए तक में बिक रहे हैं। होली के रंगों से बालों को बचाने के लिए दूल्हा पगड़ी और विशेष टोपी 50 से 100 रुपए में मिल रही है। गुलाल की कीमत करीब 100 रुपए प्रति किलो बताई जा रही है।

होली में रंग-गुलाल के साथ नगाड़ों का भी विशेष महत्व रहता है। नगाड़े की थाप पर फाग गीतों के साथ होली का उत्साह दोगुना हो जाता है। यही कारण है कि जिला मुख्यालय के धड़ी चौक के पास नगाड़ों की दुकानें सज गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी खैरागढ़ और डोंगरगढ़ से व्यापारी परिवार सहित यहां नगाड़े बेचने पहुंचे हैं। व्यापारियों का कहना है कि नगाड़े मशीन से नहीं बल्कि हाथों से मेहनतपूर्वक तैयार किए जाते हैं, जिसमें पूरा परिवार जुटा रहता है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण इस वर्ष नगाड़ों के दाम में लगभग पांच प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। बाजार में 100 रुपए से लेकर 2200 रुपए तक के छोटे-बड़े नगाड़े उपलब्ध हैं।
इधर मोहल्लों में बच्चे होलिका दहन की तैयारियों में जुट गए हैं और लकड़ियां एकत्र की जा रही हैं। तिथियों को लेकर भले ही असमंजस की स्थिति बनी हुई हो, लेकिन रंगों और उत्साह के साथ बालोद का बाजार होली के स्वागत को तैयार नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में खरीदारी और तेज होने की संभावना है।




















