मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (PWD) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़कों का निरीक्षण निर्माण पूरा होने के बाद नहीं बल्कि निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर किया जाए। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि आम लोगों की सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य हैं और सरकार की छवि भी इनसे बनती है।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि सड़क कुछ ही वर्षों में खराब हो जाए तो यह गंभीर लापरवाही है। इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की जांच करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़क परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन आम लोगों तक इनकी जानकारी नहीं पहुंच पाती। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रमुख सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कराए जाएं और उन्हें व्यापक रूप से सार्वजनिक किया जाए ताकि सकारात्मक माहौल बन सके।
बैठक में टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर ले लेते हैं, जिसके कारण बाद में काम समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार की जाए। अन्य राज्यों की बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें छत्तीसगढ़ में लागू करने पर भी विचार करने को कहा गया। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए अलग इकाई बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में करीब 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के समय संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मुख्यमंत्री ने इन गांवों को सड़क और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का काम प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए।
लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है, इसलिए सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है। जिन हिस्सों में वन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है, वहां कार्य जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-43) सहित कई प्रमुख सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के विभिन्न चरणों पर चर्चा हुई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग और चिल्फी क्षेत्र की सड़कों की प्रगति भी समीक्षा में शामिल रही।
बस्तर क्षेत्र में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण और उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना की आगामी कार्ययोजना की रूपरेखा भी बैठक में प्रस्तुत की गई।
भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों का डिजाइन लंबे समय से एक जैसा और पुराना दिखाई देता है। अब भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की बजाय वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही और राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को आधुनिक स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं और उनकी गुणवत्ता को लोग सबसे पहले देखते हैं। इसलिए लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसा तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




















