जिनके कंधे पर रोका छेका अभियान का जिम्मा उन्ही के वाहनों के नीचे आ रहे गौधन..फिर एक सीईओ के गाड़ी ने रौंदा बछड़े को..मामले में आज दल्लीराजहरा थाने में हो सकती है शिकायत
जिनके कंधे पर रोका छेका अभियान का जिम्मा उन्ही के वाहनों के नीचे आ रहे गौधन..फिर एक सीईओ के गाड़ी ने रौंदा बछड़े को..मामले में आज दल्लीराजहरा थाने में हो सकती है शिकायत
बालोद- बालोद जिले में एक के बाद एक अधिकारियों के गाड़ी के चपेट में गौधन आने का मामला नही थम रहा पिछले माह ही जहां बालोद जिला मुख्यालय में ऐसे ही बालोद जिले के तीन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाते हुए बछड़े को रौंदने का मामला सामने आया था जो मामला अभी शांत भी नही हुआ है और एक मामला सामने आया है इस बार भी ग्रामीण पंचायत विभाग के एक अधिकारी का ही मामला सामने आया जिसमे डोंडी जनपद पंचायत के सीएओ बीएस राज की गाड़ी ने दल्लीराजहरा के सब्जी बाजार स्थित जेडी ऑफिस में एक बछड़े को रौंदने का मामला सामने आया है ।मामले में स्थानीय लोगो द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इस घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारी का एक अमानवीय चेहरा सामने आया जिसमे डौंडी जनपद सीईओ की गाड़ी सड़क पर बैठे बछड़े के ऊपर चढ़ने के बाद लोगो की भीड़ लग गई और आनन फानन में एक जैक लगाकर बछड़े को बाहर निकाला गया लेकिन पूरे घटनाक्रम के दौरान अधिकारी अपने कार पर ही बैठे रहे और बछड़े को बाहर निकालने के बाद अधिकारी सीधे डौंडी की ओर निकल पड़े…
इस घटना में बछड़े की कमर टूटने की जानकारी सामने आ रही है। बता दे कि दल्लीराजहरा के गौसेवा से जुड़े सगठन के लोगो द्वारा सीएओ के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।जानकारी के अनुसार गुरुवार की शाम 6 बजे जनपद पंचायत के सीएओ की कार को उसके ड्राइवर द्वारा लापरवाही पूर्वक चलाते हुए डोंडी जा रहे थे इस दौरान दल्लीराजहरा के सब्जी बाजार स्थित जेडी ऑफिस के सामने सड़क पर बैठी बछड़े को रौंदते हुए डोंडी की ओर निकल गए।कार के चपेट में आने से बछड़े की कमर टूट गई है।
पिछले मामले में अब तक बालोद थाने में नही हुई कार्यवाही
आपको बतादे पिछले माह बालोद जिला मुख्यालय में भी ऐसा ही मामला सामने आया था जिसमे अधिकारी की गाड़ी बछड़े को घसीटते हुए काफी दूर तक ले गए थे और गभीर रूप से घायल बछड़े को समुचित इलाज नही मिलने से मौत हो गई मामले में यूथ कांग्रेस ने थाने व जिला प्रशासन के पास जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग किये थे लेकिन आज तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है वही फिर एक नया मामला उसी विभाग से जुड़े एक और अधिकारी का सामने आया है बहरहाल देखना होगा जिन जिम्मेदार अधिकारियों के कंधे पर रोका छेका जैसे अभियान की प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है उन्ही के वाहनों के नीचे आकर गौधनों की क्षति हो रही है ऐसे लोगो पर क्या कार्यवाही होती है