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24 घंटे की ड्यूटी और नाइट शिफ्ट से प्रभावित हो रहा मानसिक स्वास्थ्य, पुलिसकर्मियों को तनाव प्रबंधन के बताए उपाय

बालोद। 14वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल धनोरा में पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को लेकर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेनानी मोनिका ठाकुर की पहल पर 8 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में पुलिसकर्मियों को तनाव, अवसाद, अनियमित ड्यूटी और बदलती जीवनशैली के मानसिक एवं शारीरिक प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने तनाव की पहचान, उससे बचाव और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

24 घंटे की ड्यूटी और नाइट शिफ्ट का असर

सेमिनार की शुरुआत सेनानी मोनिका ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में लंबे समय तक ड्यूटी, अनिश्चित कार्य समय और लगातार काम का दबाव अधिकारी-कर्मचारियों की दिनचर्या को प्रभावित करता है। 24 घंटे की ड्यूटी और नाइट शिफ्ट के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती, जिसका सीधा असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

 

उन्होंने कहा कि लगातार ड्यूटी के चलते कई बार पुलिसकर्मी अपने परिवार, बच्चों और सामाजिक जीवन के लिए भी पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में मानसिक रूप से स्वस्थ रहना उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना। तनावमुक्त और मानसिक रूप से स्वस्थ पुलिसकर्मी ही अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकता है।

विशेषज्ञों ने तनाव और अवसाद से बचाव के बताए तरीके

कार्यक्रम में सेंट्रल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस, जीई रोड देवादा, जिला राजनांदगांव से डॉ. सुगम सावंत, सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक के. एम.एस. खान, नशा मुक्ति प्रभारी रोशिता पिल्लई सहित उनकी टीम शामिल हुई।

विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं, उनके कारणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियमित ड्यूटी, नींद की कमी, लगातार कार्य दबाव और जिम्मेदारियों के कारण पुलिसकर्मियों में तनाव और अवसाद का जोखिम बढ़ सकता है। लंबे समय तक तनाव में रहने का असर व्यक्ति के व्यवहार, कार्यक्षमता, नींद और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है।

नशे और मोबाइल के अनियंत्रित इस्तेमाल से बचने की सलाह

सेमिनार में नशे की आदत और मोबाइल उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि तनाव से बचने के लिए नशे को सहारा बनाना समस्या को और गंभीर कर सकता है। इसी तरह मोबाइल का अनियंत्रित उपयोग नींद और दैनिक दिनचर्या को प्रभावित करते हुए मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

पुलिसकर्मियों से कहा गया कि मानसिक परेशानी, तनाव या अवसाद के लक्षणों को छिपाने के बजाय समय रहते परिवार, सहकर्मियों या विशेषज्ञों से बातचीत करें। समय पर संवाद, उचित परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर उपचार के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

स्वस्थ मन, सशक्त पुलिस का संदेश

14वीं वाहिनी द्वारा आयोजित इस सेमिनार का उद्देश्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को तनावमुक्त, स्वस्थ और सकारात्मक कार्य वातावरण के लिए जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि पुलिस बल की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और पारिवारिक-सामाजिक संतुलन से भी सीधे जुड़ा है। सेमिनार के माध्यम से ‘स्वस्थ मन, सशक्त पुलिस’ का संदेश दिया गया।

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